संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में हाल ही में पारित हुए प्रस्ताव 2817 (2026) के बाद ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया है। ईरान ने परिषद के सदस्य देशों से अपील की है कि वे अमेरिका को UNSC के मंच का गलत इस्तेमाल न करने दें। ईरानी राजदूत आमिर सईद इरावानी ने इस प्रस्ताव को ईरान के खिलाफ अन्याय बताया है और परिषद के अध्यक्ष के तौर पर अमेरिका की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
UNSC प्रस्ताव 2817 में क्या है और किन देशों पर हुआ असर?
यह प्रस्ताव 11 मार्च 2026 को पास किया गया था जिसमें ईरान से तुरंत हमले रोकने की मांग की गई है। इसमें खाड़ी के देशों जैसे संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, कुवैत, कतर और ओमान के खिलाफ हमलों को बंद करने को कहा गया है। इसके अलावा Strait of Hormuz में अंतरराष्ट्रीय जहाजों के आवागमन में बाधा न डालने की भी चेतावनी दी गई है। प्रस्ताव के पक्ष में 13 वोट पड़े जबकि रूस और चीन ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।
इस विवाद में किन देशों ने किसका साथ दिया?
इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग राय देखने को मिली है। जहाँ अमेरिका और ब्रिटेन ने इस प्रस्ताव का पूरा समर्थन किया है, वहीं 22 मार्च 2026 को UAE समेत 20 से ज्यादा देशों ने एक साझा बयान जारी कर ईरान के हमलों की निंदा की।
| पक्ष / देश | मुख्य भूमिका |
|---|---|
| संयुक्त अरब अमीरात (UAE) | 20 देशों के साथ मिलकर हमलों की कड़ी निंदा की और सुरक्षा की मांग की |
| ईरान | प्रस्ताव को अमेरिका और Israel का राजनीतिक एजेंडा बताया |
| रूस और चीन | प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान तटस्थ रहे और हिस्सा नहीं लिया |
| बहरीन | GCC देशों की तरफ से सुरक्षा उपायों को पेश किया |
| ब्रिटेन | रूस के संघर्ष विराम वाले प्रस्ताव को खारिज करते हुए अमेरिका का साथ दिया |
ईरान का कहना है कि वह खुद हमले का शिकार रहा है और अमेरिका अपनी शक्ति का दुरुपयोग करके उसे निशाना बना रहा है। दूसरी ओर खाड़ी देशों का कहना है कि व्यावसायिक जहाजों और नागरिक सुविधाओं पर हमले तुरंत बंद होने चाहिए। इस तनाव का सीधा असर खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और वहां की तेल सप्लाई पर पड़ सकता है।
