ईरान ने अपनी निगरानी शक्ति बढ़ाने के लिए चीन से एक जासूसी सैटेलाइट ली है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस सैटेलाइट का इस्तेमाल मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की जासूसी के लिए किया गया। इस खबर के बाद से इलाके में तनाव बढ़ गया है और चीन ने इन दावों को गलत बताया है।

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सैटेलाइट के जरिए किन जगहों की जासूसी की गई

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने इस सैटेलाइट के जरिए मिडिल ईस्ट के कई महत्वपूर्ण सैन्य और रणनीतिक ठिकानों की तस्वीरें लीं। इनमें अमेरिका के कई एयर बेस और बंदरगाह शामिल थे। नीचे दी गई टेबल में उन जगहों की जानकारी है जहाँ निगरानी की गई

देश निगरानी की गई जगह
सऊदी अरब प्रिंस सुल्तान एयर बेस
जॉर्डन मुवाफ़्फ़ाक साल्टी एयर बेस
बहरीन फिफ्थ फ्लीट नेवल बेस और अल्बा एल्युमिनियम प्लांट
इराक अर्बिल एयरपोर्ट
कुवैत कैंप ब्यूहरिंग और अली अल सालेम एयर बेस
जिबूती कैंप लेमोनियर
ओमान दुक्म इंटरनेशनल एयरपोर्ट
UAE खोर फक्कन कंटेनर पोर्ट और एक पावर प्लांट

चीन और अमेरिका का इस मामले पर क्या कहना है

चीन के विदेश मंत्रालय ने 15 अप्रैल 2026 को इन खबरों को पूरी तरह गलत बताया। प्रवक्ता लिन जियान ने इसे अफवाह कहा और कहा कि चीन ऐसी गलत जानकारियों का विरोध करता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने इन आरोपों के आधार पर चीन पर टैरिफ लगाए, तो चीन जवाबी कार्रवाई करेगा। दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पुष्टि की कि सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर अमेरिकी विमानों पर हमला हुआ था।

यह पूरा मामला क्या है और कैसे हुआ

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने 2024 के अंत में चीन की कंपनी Earth Eye Co से TEE-01B नाम की सैटेलाइट ली थी। इसे कंट्रोल करने और डेटा पाने के लिए बीजिंग की कंपनी Emposat की मदद ली गई। बताया गया कि मार्च 2026 में इसी सैटेलाइट से सैन्य ठिकानों की तस्वीरें ली गईं और फिर उन जगहों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए गए।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.