UAE राष्ट्रपति के डिप्लोमैटिक एडवाइजर डॉ Anwar Gargash ने ईरान के हमलों को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने बताया कि ईरान का हमला कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि यह पूरी तरह प्लान किया गया था। इस हमले ने पूरे इलाके में भरोसे का एक बड़ा संकट पैदा कर दिया है जो आने वाले कई सालों तक रह सकता है।

ईरान के हमलों की असलियत और आंकड़े क्या हैं?

डॉ Gargash के मुताबिक, ईरान के हमले बहुत गंभीर और सोच-समझकर किए गए थे। उन्होंने बताया कि Gulf देशों ने शांति बनाए रखने की पूरी कोशिश की, लेकिनcontainment की नीति नाकाम रही। हमलों के दौरान UAE के एल्युमिनियम उद्योगों और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया था।

  • पिछले 40 दिनों में ईरान ने कुल 2,819 बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन दागे।
  • UAE ने 28 फरवरी से अब तक 2,191 ड्रोन, 507 बैलिस्टिक मिसाइल और 24 क्रूज मिसाइलों को हवा में ही रोक लिया।

UAE ने ईरान से क्या मांग की है और अमेरिका का क्या रोल है?

UAE सरकार का कहना है कि भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने के लिए ईरान को पक्की गारंटी देनी होगी। साथ ही, आम लोगों और सरकारी सुविधाओं को हुए नुकसान के लिए ईरान को हर्जाना देना होगा। डॉ Gargash ने कहा कि किसी भी राजनीतिक समाधान में गैर-आक्रमण की शर्त और हर्जाने का मुद्दा शामिल होना चाहिए।

इस पूरे संकट के बीच अमेरिका की भूमिका और ज्यादा अहम हो गई है। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय स्थिरता और साझा हितों की रक्षा के लिए अमेरिका का साथ अब और मजबूत हो गया है।

अरब देशों और GCC के बीच क्या स्थिति है?

डॉ Gargash ने माना कि इस संकट के समय GCC देशों के बीच आपसी तालमेल पहले के मुकाबले काफी कम रहा। अरब लीग से भी वैसी उम्मीद नहीं थी जैसी होनी चाहिए थी। उन्होंने बताया कि इस हमले ने अरब देशों की नेशनल सिक्योरिटी की कमियों और अलग-अलग प्राथमिकताओं को सबके सामने ला दिया है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com