ईरान ने दावा किया है कि मिडल ईस्ट के कुछ देशों ने उसके खिलाफ चल रहे युद्ध में हिस्सा लिया है। 27 जुलाई 2026 को ईरान ने ऐलान किया कि वह फिलहाल अमेरिका के सहयोगियों पर अपने जवाबी हमलों को रोक रहा है। यह फैसला अमेरिका द्वारा लगातार दो रातों तक कोई हमला न करने के बाद लिया गया है। ईरानी सेना के प्रवक्ता मोहम्मद अकरमिनियम ने पुष्टि की कि ऑपरेशन रोक दिए गए हैं, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने हमले दोबारा शुरू किए, तो संघर्ष और बढ़ सकता है।
क्षेत्रीय तनाव और राजनयिक प्रतिक्रिया
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच चल रहे संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं है और इसके लिए बातचीत जरूरी है। उन्होंने कैस्पियन सागर में एक ईरानी कमर्शियल जहाज पर हुए यूक्रेनी हमले की निंदा करते हुए इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताया। अरागची ने आरोप लगाया कि यह हमला इसराइल के इशारे पर यूरोप को युद्ध में घसीटने के लिए किया गया। इस मुद्दे पर रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने भी चर्चा की है।
क्षेत्र में बढ़ रही मुश्किलें
ईरान के सुप्रीम लीडर मोतबा खामेनेई ने अमेरिका और इसराइल के खिलाफ प्रतिरोध जारी रखने का आह्वान किया है। वहीं, UAE के विदेश मंत्रालय ने वेस्ट बैंक में इसराइली निवासियों द्वारा किए गए हमलों की कड़ी निंदा की है और इसके लिए इसराइली सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। इसके अलावा, ओमान और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने को लेकर बातचीत चल रही है, जबकि खबरों के अनुसार ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने इस रास्ते से छह जहाजों को वापस भेज दिया है।
