ईरान के भारत में राजदूत Mohammad Fathali ने एक इंटरव्यू में दुनिया को साफ संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान ऐसा देश नहीं है जिस पर किसी बाहरी ताकत की मर्जी या दबाव थोपा जा सके। राजदूत ने इसराइल और अमेरिका की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए बताया कि कैसे इन वजहों से पूरे इलाके और ग्लोबल इकोनॉमी को भारी नुकसान हुआ है।

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Mohammad Fathali ने ‘Zionist regime’ यानी इसराइल पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इसराइल की नीतियां टकराव बढ़ाने वाली और अस्थिर करने वाली हैं। राजदूत के मुताबिक, इसराइल ने जानबूझकर इलाके में असुरक्षा, तनाव और संकट पैदा किया ताकि देशों के बीच सहयोग और भरोसे का माहौल न बन सके। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के कुछ बड़े फैसले इसराइल के उकसावे और उनके द्वारा फैलाए गए नैरेटिव के प्रभाव में लिए गए।

युद्ध और उसके असर पर बात करते हुए राजदूत ने कहा कि यह लड़ाई अपने घोषित उद्देश्यों को पाने में पूरी तरह नाकाम रही। इस युद्ध की वजह से न केवल क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ी, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसका बुरा असर पड़ा और भारी लागत चुकानी पड़ी।

Strait of Hormuz की सुरक्षा को लेकर Mohammad Fathali ने भारत और दुनिया को भरोसा दिलाया कि जहाजों के आने-जाने की आजादी ईरान का बुनियादी सिद्धांत है। उन्होंने कहा कि बाहरी दखल की वजह से ही वहां तनाव बढ़ा। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि हाल ही में साइन हुए एक डिप्लोमैटिक MoU (समझौता ज्ञापन) से भविष्य में लंबी स्थिरता आएगी, बशर्ते सभी अंतरराष्ट्रीय पार्टनर नेक नियत से काम करें।

भारत के साथ व्यापारिक रिश्तों पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि प्रतिबंधों (sanctions) के हटने से दोनों देशों के बीच ट्रेड फिर से पुराने रिकॉर्ड तोड़ सकता है। उन्होंने याद दिलाया कि प्रतिबंधों से पहले ईरान भारत के टॉप तीन कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल था और सालाना व्यापार 17 अरब डॉलर से ज्यादा था।

इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच एक नए शांति समझौते की चर्चाएं भी तेज हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ऐलान किया कि उनके ईरान डील के बाद तेल की कीमतों में कमी आई है और शेयर बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है।