ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत को लेकर एक नया विवाद शुरू हो गया है। ईरान के यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के प्रोफेसर मोस्तफा खोशचेश्म ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि वॉशिंगटन बातचीत में बिल्कुल भी गंभीर नहीं है और केवल समय बिताने की कोशिश कर रहा है ताकि बाद में फिर से युद्ध शुरू किया जा सके।
अमेरिका की नीयत और मांगों पर क्या सवाल उठे
प्रोफेसर मोस्तफा खोशचेश्म ने 11 मई, 2026 को अल जज़ीरा को दिए एक बयान में साफ किया कि अमेरिका की मांगें अवास्तविक हैं। उनके मुताबिक, अमेरिका बातचीत के जरिए वह सब हासिल करना चाहता है जो वह युद्ध के मैदान में नहीं कर पाया। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान हमेशा बातचीत की मेज पर मौजूद रहा और उसने कभी वार्ता का रास्ता नहीं छोड़ा, लेकिन अमेरिकी पक्ष ने खुद ही बातचीत का दरवाजा बंद कर दिया है। प्रोफेसर ने यह भी साफ किया कि तेहरान डोनाल्ड ट्रंप को किसी भी तरह की बातचीत के लिए एक भरोसेमंद साझेदार नहीं मानता है।
ईरानी अधिकारियों और नेताओं का क्या है रुख
सिर्फ प्रोफेसर ही नहीं, बल्कि ईरान के अन्य बड़े अधिकारियों ने भी अमेरिका पर अविश्वास जताया है:
- मोहम्मद बाघर ग़ालिबफ़: ईरानी संसद के स्पीकर ने 12 अप्रैल, 2026 को कहा कि अमेरिका ईरान का भरोसा जीतने में पूरी तरह नाकाम रहा और धमकी के साए में कोई भी बातचीत मंजूर नहीं होगी।
- सैयद अब्बास अराघची: ईरानी विदेश मंत्री 25 अप्रैल, 2026 को पाकिस्तान में अमेरिकी प्रतिनिधियों से मिले बिना ही लौट आए, जिससे बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला।
- मोश्तबा खामेनेई: सुप्रीम लीडर के बेटे ने 18 अप्रैल, 2026 को चेतावनी दी कि बातचीत की आड़ में किसी भी साजिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ईरानी सेना पूरी तरह तैयार है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
प्रोफेसर मोस्तफा खोशचेश्म ने अमेरिका पर क्या आरोप लगाया है
उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका बातचीत को गंभीरता से नहीं ले रहा है और केवल समय बर्बाद कर रहा है ताकि वह भविष्य में युद्ध की तैयारी कर सके।
ईरान डोनाल्ड ट्रंप को लेकर क्या सोचता है
तेहरान डोनाल्ड ट्रंप को किसी भी बातचीत में एक भरोसेमंद साझेदार नहीं मानता है और उनका मानना है कि अमेरिकी पक्ष से वार्ता के रास्ते बंद कर दिए गए हैं।
