Iran Inflation Update: ईरान में महंगाई ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, सालाना महंगाई दर बढ़कर पहुंची 66 प्रतिशत तक.

ईरान में इन दिनों आर्थिक संकट बहुत ज्यादा गहरा गया है, जिससे आम आदमी की जिंदगी बहुत मुश्किल हो गई है। जुलाई 2026 को खत्म हुए साल के लिए ईरान की सालाना महंगाई दर बढ़कर 66 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह आंकड़े ईरान के सांख्यिकी केंद्र यानी Statistical Center of Iran (SCI) और ईरानी श्रम समाचार एजेंसी ILNA की रिपोर्ट से सामने आए हैं। इससे पहले जून के महीने में यह महंगाई दर 62 प्रतिशत दर्ज की गई थी, जो अब और ज्यादा बढ़ गई है। जुलाई के महीने में कुल उपभोक्ता कीमतें पिछले साल की तुलना में 87.9 प्रतिशत ज्यादा दर्ज की गईं, जबकि खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर तो बढ़कर 128.1 प्रतिशत हो गई है। इस गंभीर स्थिति के कारण आम जनता का घर चलाना बहुत कठिन हो गया है।
खाने-पीने की चीजों के दामों में भारी उछाल
ईरान में खाने-पीने की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं जिससे लोगों की थाली से जरूरी चीजें गायब होती जा रही हैं। विशेष रूप से तेल और वसा यानी oils and fats के दाम में 261.5 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा डेयरी उत्पादों यानी dairy products के दाम 147.1 प्रतिशत, लाल और सफेद मांस यानी red and white meat के दाम 145.2 प्रतिशत और ब्रेड तथा अनाज यानी bread and cereals के दाम 116.7 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। ईरान के केंद्रीय बैंक यानी Central Bank of Iran (CBI) ने भी 22 जुलाई 2026 तक बारह महीने की औसत महंगाई दर 61.4 प्रतिशत रहने की पुष्टि की है। देश में लगातार बढ़ रही इन कीमतों के कारण हर वर्ग के लोग परेशान हैं और अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
सरकार और अधिकारियों के बयान
बढ़ती महंगाई और आर्थिक दबाव को लेकर देश के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने यह स्वीकार किया है कि देश की समस्याएं काफी बढ़ गई हैं और लोगों की आमदनी में लगातार गिरावट आई है। उन्होंने 6 अगस्त 2026 को यह बयान दिया था कि इस आर्थिक दबाव के पीछे विदेशी हस्तक्षेप का हाथ है जिसका मकसद देश में अशांति फैलाना है। देश के पहले उप-राष्ट्रपति Mohammad Reza Aref ने 17 अगस्त 2026 को यह कहा कि लोगों के जीवन स्तर में सुधार करना सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता है। हालांकि इससे पहले 16 अगस्त को उन्होंने यह भी माना था कि बाजार में कीमतों की यह स्थिति बहुत दर्दनाक है। दूसरी ओर कृषि मंत्री Gholamreza Nouri-Ghezeljeh ने 16 अगस्त को दावा किया था कि देश में खाद्य सुरक्षा अभी भी सुचारू रूप से काम कर रही है। वहीं ऊर्जा प्रबंधन प्रमुख Saqab-Esfahani ने 15 अगस्त को यह जानकारी दी कि हालिया युद्ध के कारण पेट्रोल और गैसोलिन के उत्पादन की क्षमता पर बहुत बुरा असर पड़ा है।
मजदूरों और अर्थशास्त्रियों की चिंता
देश की आर्थिक हालत पर चिंता जताते हुए श्रम कार्यकर्ता Faramarz Toufighi ने 17 अगस्त को बताया कि न्यूनतम वेतन पर काम करने वाले मजदूर और रिटायर्ड लोग अब महीने में केवल आठ दिन का ही खर्चा उठाने में सक्षम हैं। अर्थशास्त्री Farshad Momeni ने 13 अगस्त को चेतावनी दी थी कि देश अब आर्थिक बदहाली के दौर में प्रवेश कर चुका है जहां कुछ आय वर्ग के लोगों को तीन अंकों की महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। इस बात का समर्थन करते हुए दूसरे अर्थशास्त्री Masoud Nili ने 15 अगस्त को मौजूदा स्थिति को सामान्य महंगाई और अतिमुद्रास्फीति यानी हाइपरइफ्लेशन के बीच की स्थिति बताया। एसोसिएट फेलो Miad Maleki ने 6 अगस्त को यह बात कही थी कि देश का मुद्रा संकट परिवारों की बुनियादी कैलोरी पहुंच को एक खतरनाक मोड़ पर ले आया है। इन सभी हालातों के बीच सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों ने यह कदम उठाया है कि उन्होंने आर्थिक तंगी के कारण होने वाले किसी भी बड़े नागरिक असंतोष को रोकने के लिए Hossein Taeb को बासिज मिलिशिया का नेतृत्व सौंप दिया है।