ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी IRNA की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वहां के एक ईसाई पादरी ने कहा है कि देश में सभी जातीय और धार्मिक समुदायों को समान अधिकार मिलते हैं. इस बयान के बाद एक बार फिर ईरान में अल्पसंख्यकों की स्थिति और उनके साथ होने वाले बर्ताव पर चर्चा शुरू हो गई है.

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ईरान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर क्या दावे किए गए?

ईरान के ईसाई धर्मगुरुओं ने समय-समय पर वहां की सरकार और माहौल की तारीफ की है. इस मामले में कुछ मुख्य बातें सामने आई हैं:

  • बिशप थॉमस मिर्म ने साल 2012 में कहा था कि ईरान सभी धार्मिक समूहों के लिए शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का एक अच्छा उदाहरण है.
  • पादरी दर्यावोश अज़ीज़ियन ने 2013 और 2022 में ईरान को धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए दुनिया का सबसे सुरक्षित देश बताया था. उन्होंने कहा कि ईसाइयों के शैक्षणिक और सांस्कृतिक कामों को सरकार प्राथमिकता देती है.
  • मार आवा III ने 2023 में ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी से मुलाकात के दौरान अंतरधार्मिक संवाद और सम्मान के लिए ईरान की सराहना की थी.

ईरान के कानून और चर्च की व्यवस्था कैसी है?

ईरान के आधिकारिक नियमों और रिपोर्टों के अनुसार, वहां धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए कुछ खास इंतज़ाम किए गए हैं:

  • ईरानी संसद में असीरियन समुदाय का एक प्रतिनिधि होता है, जो उनकी आवाज़ सरकार तक पहुँचाता है.
  • रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान में ईसाइयों के लिए करीब 400 चर्च काम कर रहे हैं.
  • सरकारी ढांचे में अलग-अलग धर्मों के लोगों को जगह दी गई है ताकि सभी समुदायों का सम्मान बना रहे.

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान में ईसाई धर्मगुरुओं का क्या कहना है?

ईरान के कई ईसाई पादरियों और बिशप्स ने कहा है कि ईरान धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए एक सुरक्षित देश है और यहाँ सभी समुदायों को बराबर के अधिकार मिलते हैं.

क्या ईरान में ईसाइयों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलता है?

हाँ, ईरान की संसद में असीरियन समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक सदस्य होता है, जिससे उनके अधिकारों की रक्षा हो सके.