दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेजी आई है। मंगलवार, 7 जुलाई 2026 को ईरान ने Strait of Hormuz के पास कतर के एक तेल टैंकर पर हमला कर दिया। इस हमले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है, जिससे बाजार में घबराहट है और पहले से बनी कमजोर शांति अब खतरे में है।
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इस हमले के बाद Brent crude की कीमतें 3% बढ़कर 74.16 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुईं, जबकि अमेरिका के West Texas Intermediate (WTI) में 2.8% की बढ़ोतरी हुई और यह 70.44 डॉलर तक पहुंच गया। इसके बाद जब अमेरिका सरकार ने ईरान का तेल बेचने का लाइसेंस रद्द किया, तो कीमतों में और उछाल आया।
| विवरण | कीमत/डाटा |
|---|---|
| Brent Crude (7 जुलाई) | 74.16 डॉलर |
| WTI Crude (7 जुलाई) | 70.44 डॉलर |
| Brent Crude (After-hours) | 76.04 डॉलर |
| WTI Crude (After-hours) | 72.25 डॉलर |
| Brent Crude (मार्च का उच्चतम स्तर) | 120 डॉलर से ज्यादा |
| Strait of Hormuz तेल ट्रैफिक | लगभग 20% |
Strait of Hormuz दुनिया के तेल व्यापार के लिए बहुत जरूरी रास्ता है, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने UAE, कुवैत और बहरीन का दौरा कर अमेरिका-ईरान समझौते को आगे बढ़ाने की कोशिश की थी, लेकिन वहां के नेताओं ने इस डील के सफल होने पर भरोसा नहीं जताया।
यह पूरा संकट 4 मार्च 2026 को शुरू हुआ था जब ईरान ने इस समुद्री रास्ते को बंद कर दिया था। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने इसे दुनिया के तेल बाजार का अब तक का सबसे बड़ा संकट बताया था। उस समय तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक चली गई थीं और QatarEnergy को अपने सभी एक्सपोर्ट पर रोक लगानी पड़ी थी।
एक्सपर्ट Andrew Lipow का कहना है कि तेल की सप्लाई को पहले जैसा करने में काफी समय लगेगा, क्योंकि सबसे पहले समुद्री रास्ते से बारूदी सुरंगों (mines) को हटाना होगा।
