ईरान ने सऊदी अरब और कतर के तेल टैंकरों पर हमला कर दिया है. इस हमले के साथ ही कुवैत और बहरीन में भी तनाव बढ़ गया है. अरब देशों के आंतरिक मंत्रियों की काउंसिल ने इस हरकत को बेहद खतरनाक बताया है और कहा है कि इससे पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ सकता है.

ट्यूनिस में मौजूद अरब आंतरिक मंत्रियों की काउंसिल (AIMC) ने ईरान की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है. काउंसिल ने कहा कि ईरान का यह हमला अंतरराष्ट्रीय कानूनों और पड़ोसियों के साथ अच्छे रिश्तों के खिलाफ है. अरब लीग के महासचिव नबील फहमी ने भी इस हमले पर चिंता जताई है और कहा कि इससे शांति की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है.

जानकारी के मुताबिक, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सऊदी अरब के तेल टैंकर “Wedyan” और कतर के LNG टैंकर “Al-Rekayyat” को निशाना बनाया गया. कतर का जहाज ओमान के पास फंसा हुआ है क्योंकि हमले के बाद उसमें आग लग गई थी. कतर के विदेश मंत्रालय ने ईरान के डिप्टी एम्बेसडर को बुलाकर कड़ी चेतावनी दी और इस हमले के लिए ईरान को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया. सऊदी विदेश मंत्रालय ने भी इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे तुरंत रोकने की मांग की है.

इस बीच कुवैत और बहरीन में भी हालात तनावपूर्ण रहे. कुवैत की सेना ने अपनी हवाई सीमा में एक क्रूज मिसाइल, तीन बैलिस्टिक मिसाइल और 10 ड्रोन को रोका. हालांकि, गिरते हुए मलबे से एक व्यक्ति घायल हो गया. बहरीन में भी हवाई हमलों की चेतावनी के बाद सायरन बजाए गए, लेकिन वहां के डिफेंस सिस्टम ने ईरानी हमलों को नाकाम कर दिया. संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र, जॉर्डन और सीरिया ने भी सऊदी, कतर, कुवैत और बहरीन के साथ अपनी एकजुटता जताई है.

दूसरी तरफ, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उन्होंने कुवैत के कैंप अरिफजान और अली अल सलेम एयर बेस समेत बहरीन के जुफैर और शेख ईसा बेस पर हमला किया है. ईरान का कहना है कि यह अमेरिका द्वारा किए गए हमलों का बदला है जिसमें उनके 14 लोग मारे गए थे. इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह ऐलान कर दिया कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने का अंतरिम समझौता अब खत्म हो चुका है.

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.