ईरान की क्रांतिकारी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने Kuwait और Bahrain में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और अमेरिकी नौसेना पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है। इस खबर के बाद दोनों देशों में अलर्ट जारी कर दिया गया है और लोगों को सुरक्षा नियमों का पालन करने को कहा गया है। यह हमला अमेरिका द्वारा ईरान पर हाल ही में किए गए हमलों के जवाब में किया गया है।

Kuwait और Bahrain में क्या हुआ

Kuwait की सेना ने जानकारी दी कि देश पर दुश्मन की मिसाइलों और ड्रोन से हमला हुआ। Kuwait के एयर डिफेंस सिस्टम ने इन खतरों को रोकने के लिए कार्रवाई की। वहां रहने वाले लोगों और प्रवासियों को सलाह दी गई है कि वे सरकार द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का सख्ती से पालन करें।

वहीं Bahrain में भी स्थिति तनावपूर्ण रही और वहां एयर-रेड सायरन बजने लगे। Bahrain में अमेरिका का एक बड़ा नेवल बेस है। Bahrain के गृह मंत्रालय ने स्थानीय निवासियों और वहां रहने वाले लोगों से शांत रहने और तुरंत पास की सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की है।

हमले की वजह और ईरान का दावा

IRGC ने बताया कि उनकी नेवी और एयरोस्पेस फोर्स ने मिलकर यह हमला किया। ईरान का कहना है कि अमेरिका ने पहले उन पर हमले किए थे, इसलिए यह कार्रवाई की गई। IRGC के मुताबिक, युद्धविराम (ceasefire) का उल्लंघन करना इस्लामाबाद समझौते के खिलाफ है और अब सभी राजनयिक बातचीत को रोका जा सकता है।

अमेरिका का पक्ष और पिछली घटनाएं

US Central Command (CENTCOM) ने पुष्टि की कि उन्होंने 27 जून को ईरान के सैन्य निगरानी सिस्टम, कम्युनिकेशन सेंटर और एयर डिफेंस साइट्स को निशाना बनाया था। अमेरिका का कहना है कि 25 जून को ईरान ने एक कमर्शियल जहाज पर ड्रोन हमला किया था, जिससे युद्धविराम टूटा।

  • 25 जून: ईरान ने कमर्शियल जहाज पर ड्रोन हमला किया।
  • 27 जून: अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमला किया।
  • 28 जून: ईरान ने Kuwait और Bahrain में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया।

इससे पहले जून की शुरुआत में भी IRGC ने ऐसे ही हमलों का दावा किया था, लेकिन उस समय अमेरिकी कमांड ने कहा था कि मिसाइलें और ड्रोन निशाने पर नहीं पहुंचे या उन्हें बीच में ही रोक लिया गया था।