ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ के तहत अमेरिका और इज़राइल के 55 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया है। यह हमला 21 मार्च 2026 को किया गया जिसे ऑपरेशन की 70वीं लहर बताया जा रहा है। इस सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्र के कई इलाकों में भारी धमाके और आग लगने की खबरें मिली हैं।

किन अमेरिकी और इज़राइली ठिकानों को बनाया गया निशाना?

IRGC ने पश्चिम एशिया में मौजूद कई अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमले की बात कही है। इसमें सऊदी अरब, UAE और कुवैत में स्थित अमेरिकी बेस शामिल हैं। इज़राइल के भी कई प्रमुख शहरों के रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया है। इन हमलों के लिए ईरान ने आधुनिक मिसाइल सिस्टम और ड्रोन्स का इस्तेमाल किया है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों के लिए सुरक्षा के लिहाज से यह बड़ी खबर है।

देश/क्षेत्र निशाना बनाए गए प्रमुख ठिकाने
United States Bases Al-Kharj, Al-Dhafra, Ali Al-Salem, Erbil
Israel Strategic Sites Tel Aviv, Haifa, Hadera, Kiryat Ono, Savyon
मिसाइल के प्रकार Qiam, Emad, Khorramshahr-4, Ghadr

ईरान ने हमले के पीछे क्या वजह बताई?

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के पब्लिक रिलेशंस ऑफिस ने बयान जारी कर इस हमले की जानकारी दी है। ईरान ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई उनके सैन्य सलाहकारों की हत्या का बदला है। बयान में कहा गया कि ईरान की सेना किसी भी आक्रामक कार्रवाई का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। फिलहाल अमेरिका और इज़राइल की ओर से इन हमलों में हुए नुकसान की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

  • हमला 21 मार्च 2026 को ‘Allahu Akbar’ कोड के साथ शुरू हुआ।
  • ईरान ने कुल 55 से अधिक लोकेशन पर हमले का दावा किया है।
  • अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट के ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है।
  • टारगेटेड इलाकों से धुएं के गुबार उठने की खबरें सामने आई हैं।