मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजरायल के सैन्य अभियान के जवाब में ईरान ने बड़ी कार्रवाई की है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक नई रिपोर्ट में सैटेलाइट तस्वीरों और वीडियो के आधार पर यह पुष्टि हुई है कि ईरान ने खाड़ी देशों में मौजूद कम से कम 11 अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं। यह हमले 28 फरवरी 2026 को शुरू हुई लड़ाई के बाद जवाबी कार्रवाई के तौर पर किए गए हैं। इन हमलों की वजह से खाड़ी में रहने वाले लोगों और प्रवासियों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

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ईरान के निशाने पर आए 11 अमेरिकी ठिकाने कौन से हैं?

ईरान की ओर से किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों ने कई देशों में मौजूद अमेरिकी सेना के महत्वपूर्ण केंद्रों को नुकसान पहुंचाया है। न्यूयॉर्क टाइम्स और अन्य रिपोर्ट के मुताबिक नीचे दिए गए ठिकानों को निशाना बनाया गया है।

देश प्रभावित सैन्य ठिकाने
बहरीन यूएस नेवी फिफ्थ फ्लीट हेडक्वार्टर (मनामा)
कुवैत कैंप आरिफ़जान, अली अल-सलेम एयर बेस और कैंप बुहरिंग
इराक इरबिल इंटरनेशनल एयरपोर्ट बेस
यूएई जेबेल अली पोर्ट, अल रुवैस और अल धफरा एयर बेस
कतर अल-उदैद एयर बेस
सऊदी अरब प्रिंस सुल्तान एयर बेस
जॉर्डन मुवफ्फक साल्टी एयर बेस

नुकसान का विवरण और प्रवासियों के लिए नई गाइडलाइन

ईरान के इन हमलों में अमेरिका को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है जिसका अनुमान लगभग 2 अरब डॉलर यानी करीब 1.902 बिलियन डॉलर लगाया गया है। कतर में मौजूद अर्ली वार्निंग रडार और यूएई के रडार सिस्टम को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा कुवैत में तीन F-15E स्ट्राइक ईगल विमान भी तबाह हुए हैं। कुवैत के कैंप आरिफ़जान में 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत की भी पुष्टि हुई है।

क्षेत्र में बिगड़ते हालात को देखते हुए अमेरिका ने 2 मार्च 2026 को एक अर्जेंट अलर्ट जारी किया है। इसमें इजरायल सहित लगभग सभी मिडिल ईस्ट देशों में मौजूद अमेरिकी नागरिकों को तुरंत वहां से निकलने की सलाह दी गई है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय और अन्य प्रवासियों के लिए भी यह समय सतर्क रहने का है क्योंकि समुद्री व्यापार के लिए मशहूर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव बढ़ गया है। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा देने के लिए बीमा और नेवी सुरक्षा की व्यवस्था की जाएगी।