UAE के अल-धफरा एयर बेस पर ईरान का बड़ा हमला, ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 के तहत दागे गए ड्रोन और मिसाइल.

खाड़ी देश संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE के अबू धाबी के पास बने रणनीतिक रूप से बेहद अहम अल-धफरा एयर बेस को लेकर एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। ईरान ने अपने सैन्य अभियान 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4' के तहत इस महत्वपूर्ण अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाया है और यहां कई ड्रोन तथा मिसाइलें दागने का बड़ा दावा किया है। ईरान ने पूर्व में हुए इस हमले की पूरी जिम्मेदारी ली हैं।
अल-धफरा एयर बेस का महत्व और भौगोलिक स्थिति
अबू धाबी शहर से महज 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अल-धफरा एयर बेस खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए रीढ़ की हड्डी जैसा है। इस सैन्य ठिकाने पर अमेरिका के लड़ाकू विमान, निगरानी करने वाले यंत्र, आधुनिक ड्रोन क्षमताएं और इसके साथ-साथ कमांड, संचार तथा एयर-डिफेंस से जुड़ी तमाम भारी-भरकम सैन्य सुविधाएं हमेशा मौजूद रहती हैं। ईरान की ओर से यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और आम लोग तथा प्रवासी अपनी सुरक्षा को लेकर खासे चिंतित नजर आ रहे हैं।
ईरान की तरफ से ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल
ईरान की समाचार एजेंसी फारस की एक रिपोर्ट के हवाले से यह बात सामने आई है कि 28 फरवरी 2026 को ईरान की तरफ से जवाबी सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद से इस बेस पर कई बार ड्रोन हमले किए गए थे। ईरानी पक्ष का यह दावा है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC की एयरोस्पेस फोर्स ने बड़ी संख्या में ड्रोन का खुलकर इस्तेमाल किया और बेस की मजबूत सुरक्षा व्यवस्था को सीधी चुनौती दी। इन हमलों के दौरान शहीद-136 जैसे एकतरफा हमलावर ड्रोन का प्रमुखता से उपयोग किए जाने की बात कही जा रही है, जो अपने तय लक्ष्यों पर सीधे वार करने के लिए जाने जाते हैं।
सैटेलाइट तस्वीरों में नुकसान के संकेत
ईरानी दावों के मुताबिक, इतनी बड़ी संख्या में एक साथ आए ड्रोन ने बेस की बहुस्तरीय एयर-डिफेंस व्यवस्था पर भारी दबाव बनाया और कुछ हमले अपने लक्ष्यों तक पहुंचने में पूरी तरह कामयाब रहे। सामने आई सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण से यह बात कही जा रही है कि बेस के कुछ खास हिस्सों में हमलों के बाद नुकसान के स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं। इन प्रभावित क्षेत्रों में अमेरिकी सैन्य विमानों और ड्रोन से जुड़े इलाके, बड़े हैंगर तथा कमांड और संचार से जुड़ा बुनियादी ढांचा शामिल होने का दावा किया गया है। हालांकि, इन सभी सैन्य प्रणालियों के पूरी तरह नष्ट होने के दावों की अभी तक किसी भी स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं हो पाई है।