ईरान ने अचानक Bahrain, Kuwait और Jordan पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला कर दिया है. Gulf Cooperation Council (GCC) के महासचिव Jasem Al-Budaiwi ने इस हरकत की कड़ी निंदा की है. उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का बड़ा उल्लंघन बताया है. इस हमले के बाद पूरे इलाके में तनाव काफी बढ़ गया है.
खबरों के मुताबिक, Kuwait और Bahrain के एयर डिफेंस सिस्टम ने कई आने वाली मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही रोक दिया. वहीं Jordan की सेना ने बताया कि ईरान की तरफ से आई 8 मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया गया. ईरान के Revolutionary Guards ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है. उन्होंने कहा कि उन्होंने Bahrain और Kuwait में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और Jordan के Al Azraq एयर बेस को निशाना बनाया है. ईरान का कहना है कि यह अमेरिका की आक्रामकता का जवाब था.
GCC ने Bahrain, Kuwait और Jordan के साथ अपनी पूरी एकजुटता जताई है. GCC का कहना है कि अगर किसी एक सदस्य देश पर हमला होता है, तो उसे सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा. Jasem Al-Budaiwi ने कहा कि ईरान की यह रणनीति अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय शांति की कोशिशों को नुकसान पहुँचाने वाली है. उन्होंने UN चार्टर के आर्टिकल 2(4) का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी देश की आजादी और उसकी जमीन का सम्मान किया जाना चाहिए.
तनाव सिर्फ जमीन तक ही सीमित नहीं रहा, समुद्र में भी हमले हुए. ईरान ने Strait of Hormuz में सऊदी अरब के कच्चे तेल के टैंकर Wedyan और कतर के LNG टैंकर Al Rekayyat पर भी हमला किया. GCC ने ईरान से मांग की है कि वह UN सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 और अमेरिका के साथ हुए समझौते का पालन करे ताकि समुद्र में जहाजों का आना-जाना सुरक्षित रहे.
ईरान की इन हरकतों की निंदा केवल GCC ने ही नहीं, बल्कि Saudi Arabia, UAE, Qatar, Egypt और Oman ने भी की है. सभी देशों ने इस बात पर जोर दिया कि शांति बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करना जरूरी है.
