खाड़ी देशों में सुरक्षा की स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है क्योंकि ईरान ने एक बार फिर अपने सैन्य अभियानों को तेज कर दिया है। 18 जुलाई 2026 को UAE के विदेश मंत्रालय ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन पर हुए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। इन हमलों में मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल करके सैन्य ठिकानों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया, जिसे यूएई ने क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बताया है।
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हमले का असर और नुकसान
ईरान के इस सैन्य अभियान को उनके Thunder ऑपरेशन का 14वां चरण बताया जा रहा है। हमलों की चपेट में आए देशों में स्थिति गंभीर है। कुवैत में पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन की एक महत्वपूर्ण तेल सुविधा को नुकसान पहुंचा है और वहां काम करने वाले कई नागरिक कर्मचारी घायल हुए हैं। कुवैत फायर फोर्स ने आग बुझाने के दौरान अपने फायर फाइटर्स के घायल होने की पुष्टि की है। वहीं, जॉर्डन की सेना ने बताया कि उन्होंने 10 मिसाइलें हवा में ही नष्ट कीं और चार ड्रोन को मार गिराया।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर मंडराया संकट
बहरीन में भी हालात चिंताजनक हैं जहां पांचवीं बार एयर रेड सायरन बजाए गए। ईरान ने बहरीन में अमेरिकी नौसेना के बेस और शेख ईसा एयरबेस को निशाना बनाने का दावा किया है। इस पूरे घटनाक्रम पर GCC के महासचिव Jasem Mohamed Albudaiwi ने भी अपनी नाराजगी जताई है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन करार दिया है। फिलहाल ईरान के सैन्य कमांड ने चेतावनी दी है कि जो देश अमेरिका का साथ देंगे, उन्हें इसका परिणाम भुगतना होगा, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले प्रवासी और स्थानीय लोग भारी तनाव में हैं।
