ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बहुत बढ़ गया है। हाल ही में ईरान ने बहरीन और कुवैत पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। यह टकराव उस समय हुआ जब दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों को लेकर बातचीत चल रही थी। इस स्थिति से पूरे खाड़ी क्षेत्र में डर का माहौल है।
दोनों देशों के बीच हाल ही में कुछ समझौते की कोशिश हुई थी। 17 जून 2026 को अमेरिका और ईरान ने एक शुरुआती समझौता (MOU) किया था। इस समझौते का मकसद आपसी संघर्ष को खत्म करना था और 60 दिनों के भीतर एक अंतिम اتفاق पर पहुंचने का लक्ष्य रखा गया था। इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने जैसी बातों पर चर्चा होनी थी।
परमाणु जांच को लेकर दोनों देशों की बातों में बड़ा अंतर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति JD वेंस ने दावा किया कि ईरान ने UN के परमाणु निरीक्षकों को वापस आने की अनुमति दे दी है। वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगायी ने इन दावों को गलत बताया। ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काजেম घरिबाबादी ने साफ कहा कि परमाणु जांच पर फैसला तभी होगा जब सभी प्रतिबंध पूरी तरह खत्म कर दिए जाएंगे।
परमाणु कार्यक्रम की वर्तमान स्थिति काफी चिंताजनक बताई जा रही है। International Atomic Energy Agency (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने एक मजबूत वेरिफिकेशन सिस्टम की जरूरत बताई है। मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
- जून 2025 में अमेरिका ने ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ के तहत ईरान के नतान्ज़, इस्फ़हान और फ़ोरडो केंद्रों पर हमला किया था।
- इन हमलों के बाद ईरान ने IAEA के निरीक्षकों का वहां जाना बंद कर दिया है।
- IAEA के मुताबिक ईरान के पास 60% तक समृद्ध यूरेनियम है, जो परमाणु हथियार बनाने के करीब है।
- ईरान ने दावा किया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ शांतिपूर्ण कामों के लिए है।
28 जून 2026 को हालात और खराब हो गए। अमेरिका द्वारा दक्षिणी ईरान में किए गए हमलों के जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। ईरान ने चेतावनी दी कि अगर युद्धविराम का उल्लंघन हुआ तो वह बातचीत पूरी तरह बंद कर देगा। इस पर जवाब देते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अगर बातचीत खत्म हुई, तो इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का अस्तित्व खत्म हो जाएगा।
इस बीच, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अपना नियंत्रण बनाए रखा है और बिना अनुमति गुजरने वालों को चेतावनी दी है। वहीं लेबनान में हिजबुल्लाह ने भी चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने सशस्त्र समूहों को निशस्त्र करने की कोशिश की, तो वहां फिर से गृहयुद्ध शुरू हो सकता है।
