खाड़ी देशों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब 19 जुलाई 2026 को ईरान ने कई अरब देशों पर अचानक मिसाइल और ड्रोन से हमला कर दिया। इस हमले की चपेट में बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, कतर और ओमान जैसे देश आए हैं। अरब लीग के महासचिव नबील फहमी ने इन हमलों को बेहद खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अरब देशों पर यह हमला सीधे तौर पर उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रहार है और इलाके में तनाव बहुत बढ़ गया है।

हमले के बाद की स्थिति और प्रतिक्रिया

कुवैत और बहरीन ने पुष्टि की है कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान के हमलों का जवाब दिया है। कुवैत में ईरान के हमले से बिजली और पानी के प्लांट के साथ-साथ एक तेल सुविधा केंद्र को भी नुकसान पहुंचा है। वहीं, सऊदी अरब, मिस्र, जॉर्डन, कतर और UAE ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है। खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के महासचिव जसीम अल-बुदैवी ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।

भारतीय प्रवासियों और सुरक्षा पर असर

ईरान की ओर से UAE के दुबई और अबू धाबी के एयरपोर्ट्स और फुजैराह व जेबेल अली बंदरगाहों को लेकर भी धमकी जारी की गई है। इस बिगड़ते हालात के बीच अमेरिका ने कतर के अल उदीद एयर बेस से अपने विमानों को हटाकर इजराइल के ओवदा एयर बेस पर तैनात कर दिया है। फिलहाल ईरान का कहना है कि यह हमले अमेरिका द्वारा उनके ठिकानों पर किए गए हवाई हमलों का जवाब थे। इस पूरे विवाद के कारण अरब देशों में काम करने वाले लाखों प्रवासियों के बीच अनिश्चितता का माहौल है, क्योंकि ईरान ने पहले किए गए समझौते से भी अपने कदम पीछे खींच लिए हैं।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.