खाड़ी देशों में उस समय तनाव बढ़ गया जब 15 जुलाई 2026 को ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन पर मिसाइल और ड्रोन से हमला कर दिया। इस घटना को खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के महासचिव Jasem Albudaiwi ने एक खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना कदम बताया है। उन्होंने इन हमलों को आतंकवादी कृत्य करार देते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सीधा खतरा माना है।

हमलों का ब्यौरा और सरकारी कार्रवाई

कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी है कि ईरान के हमलों में उनके चार सैन्यकर्मी घायल हुए हैं। मंत्रालय के मुताबिक, एक नौसेना के जहाज को निशाना बनाया गया था। सुरक्षा बलों ने कुल छह मिसाइल और 33 ड्रोन को हवा में ही मार गिराया, लेकिन उनके मलबे गिरने से कई जगहों पर नुकसान हुआ है।

वहीं, बहरीन में सुरक्षा के लिए एयर रेड सायरन बजाए गए और निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया। जॉर्डन के सशस्त्र बलों ने भी बताया कि उन्होंने अपनी सीमा में घुसी तीन ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट कर दिया है। इस पूरे मामले में मिस्र ने भी निंदा करते हुए इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताया है।

ईरान का दावा और तनाव की वजह

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और वहां की सेना ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है। उनका कहना है कि यह हमला जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया गया। ईरान इसे Operation Nasr 2 और Operation Thunderbolt का हिस्सा बता रहा है, जिसे अमेरिका की पिछली कार्रवाई का जवाब बताया जा रहा है। इस घटना के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.