खाड़ी देशों में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ईरान ने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं, जिसके बाद सऊदी अरब और कतर ने इस हरकत की कड़ी निंदा की है। इन हमलों की वजह से समुद्री रास्तों, खासकर Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही पर भी बड़ा खतरा मंडराने लगा है।
सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और कतर के विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल-थानी ने 9 जुलाई 2026 को फोन पर बात की और इन हमलों पर अपनी नाराजगी जताई। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इन हमलों को अमेरिका द्वारा ईरान की जमीन पर किए गए हमलों का जवाब बताया है।
किस देश में क्या हुआ
ईरान के इन हमलों से अलग-अलग देशों में अलग-अलग हालात रहे:
- कुवैत: यहां 4 मिसाइल और 10 ड्रोन को हवा में ही रोका गया। मलबे की वजह से एक व्यक्ति घायल हुआ। वहीं ईरान का दावा है कि उसने वहां के पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया।
- बहरीन: हमलों के दौरान हवाई सायरन बजाए गए और डिफेंस सिस्टम ने मिसाइलों को रोका। ईरान ने दावा किया कि उसने उन ईंधन स्टोर साइट्स को मारा है जिन्हें अमेरिकी सेना इस्तेमाल करती थी।
- जॉर्डन: जॉर्डन की सेना ने 8 मिसाइलों को रोका। ईरान ने कहा कि उसने अल-अज़रक एयर बेस और अमेरिकी कमांड सेंटर पर हमला किया है।
- कतर: कतर में सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया था। ईरान ने दावा किया कि उसने एक सैटेलाइट साइट पर हमला किया, लेकिन कतर सरकार ने साफ किया कि उसकी हवाई सीमा का कोई उल्लंघन नहीं हुआ।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और समुद्री खतरा
सऊदी अरब ने इन हमलों को संप्रभुता का उल्लंघन और आपराधिक करार दिया है। सऊदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का हवाला देते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया। इसके अलावा UAE, मिस्र और फिलिस्तीन ने भी ईरान की इस कार्रवाई की निंदा की है।
सबसे ज्यादा चिंता Strait of Hormuz के समुद्री रास्ते को लेकर है। यहां जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने जहाजों को इस रास्ते से न जाने की सलाह दी है। UKMTO ने भी कमर्शियल जहाजों के लिए “गंभीर” खतरे की चेतावनी जारी की है क्योंकि ईरान इस जलमार्ग पर पूरा नियंत्रण चाहता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी साफ कर दिया है कि ईरान के साथ युद्धविराम अब खत्म हो चुका है।
