ईरान और अमेरिका के बीच जंग की स्थिति बन गई है। ईरान ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है। यह हमला अमेरिका द्वारा ईरान के तटीय इलाकों पर किए गए हमलों के जवाब में हुआ है। इस घटना से पूरे खाड़ी क्षेत्र में डर का माहौल बन गया है और शांति वार्ताओं के टूटने का खतरा बढ़ गया है।
🗞️: Kuwait पर फिर हुआ ड्रोन और मिसाइल हमला, एयर डिफेंस ने हवा में ही किया ढेर, कई जगह गिरा मलबा।
अमेरिका ने पहले क्यों किया हमला
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि उन्होंने ईरान के कई तटीय ठिकानों पर हमले किए थे। अमेरिका का कहना था कि ईरान ने समुद्र में चलने वाले व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया था। इसमें पनामा के तेल टैंकर Kiku और सिंगापुर के कार्गो जहाज M/V Ever Lovely पर हुए हमले शामिल थे। अमेरिका ने ईरान के निगरानी सिस्टम, संचार प्रणालियों, एयर डिफेंस और ड्रोन स्टोरेज सेंटर्स को निशाना बनाया है।
कुवैत और बहरीन में क्या हुआ
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने दावा किया है कि उन्होंने कुवैत के अली अल सलेम बेस और बहरीन के पोर्ट सलमान में स्थित अमेरिकी नेवल बेस पर हमले किए हैं। ईरान के मुताबिक उन्होंने अमेरिका की आठ महत्वपूर्ण सुविधाओं को नष्ट कर दिया है।
- कुवैत: यहाँ की सेना ने बताया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने दुश्मन की मिसाइलों और ड्रोन का मुकाबला किया।
- बहरीन: यहाँ हवाई हमले के सायरन बजने लगे और गृह मंत्रालय ने लोगों से शांत रहने और सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी।
एक अमेरिकी अधिकारी ने हमलों की पुष्टि की है, लेकिन उन्होंने यह भी बताया कि अब तक किसी अमेरिकी सैनिक के हताहत होने या किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं मिली है।
डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान ने सीजफायर समझौते का बार-बार उल्लंघन किया है, इसलिए अमेरिका ने उसके मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज सेंटर्स पर हमला किया। ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर स्थिति नहीं सुधरी, तो अमेरिका वह काम पूरा करेगा जिसे उसने शुरू किया था और तब इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा।
शांति समझौतों पर संकट
अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते पहले एक अंतरिम सीजफायर समझौता हुआ था। अब दोनों देश एक-दूसरे पर इस समझौते को तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिका की इन हरकतों की वजह से अब सभी राजनयिक बातचीत बंद हो सकती है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत चल रही थी, लेकिन इस नए तनाव के बाद शांति की उम्मीदें कम हो गई हैं।
