ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है. ईरान ने इसे अमेरिका द्वारा अपनी जमीन पर किए गए हमलों का जवाब बताया है. इस घटना के बाद पूरे खाड़ी इलाके में तनाव बढ़ गया है.
ईरान ने दावा किया कि उन्होंने कुवैत के Camp Arifjan और Ali Al Salem एयर बेस के साथ-साथ बहरीन के Juffair और Sheikh Isa बेस पर हमले किए हैं. IRGC के मुताबिक यह उनके जवाबी हमले का पहला चरण था. ईरान का कहना है कि अमेरिका ने पहले उनकी जमीन पर हमला किया था, इसलिए यह कार्रवाई की गई.
दरअसल, 7 और 8 जुलाई 2026 को अमेरिका ने ईरान के दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में कई जगह हमले किए थे. इन हमलों में रेलवे ब्रिज, सैन्य ठिकाने और आम लोगों से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाया गया था. अमेरिकी कमांड (CENTCOM) ने कहा था कि उन्होंने लगभग 90 सैन्य ठिकानों को नष्ट किया ताकि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रहे.
कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि उन्होंने दुश्मन की मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही रोक दिया. वहीं बहरीन की राजधानी मनमा में हवाई हमले के सायरन बजे और धमाकों की आवाज़ें सुनी गईं. हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि इन हमलों में किसी अमेरिकी सैनिक की जान नहीं गई और न ही सैन्य ठिकानों को कोई बड़ा नुकसान हुआ है.
इस मामले पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ सीज़फायर अब खत्म हो चुका है, लेकिन उन्होंने बातचीत के रास्ते खुले रखे हैं. दूसरी तरफ ओमान ने बहरीन और कुवैत पर हुए इन हमलों की निंदा की है. ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने फिर से हमले किए, तो वे इलाके के अन्य बेस को भी निशाना बनाएंगे.
