इजरायली हमले के बाद ईरान के कई शहरों में आसमान से काली बारिश हो रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और ईरानी प्रशासन ने लोगों को घरों के अंदर रहने की सख्त हिदायत दी है। तेल रिफाइनरियों पर हुए हमले के कारण उठने वाले धुएं और जहरीले कणों ने बारिश के पानी को काला कर दिया है। इससे खासकर बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है और लोगों को स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियां हो रही हैं।

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काली बारिश क्या है और इससे क्या नुकसान हैं?

ईरान की राजधानी तेहरान और उसके आसपास के इलाकों में यह खतरनाक बारिश देखी गई है। यह स्थिति सप्ताहांत में तेहरान और अन्य रिफाइनरियों पर इजरायली स्ट्राइक के बाद पैदा हुई है। इस हमले में चार बड़े तेल स्टोरेज और एक डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर को निशाना बनाया गया, जिससे निकला धुआं आसमान में छा गया और सूरज की रोशनी रुक गई।

मार्च के शुरुआती दिनों में मौसम में बदलाव के कारण यह जहरीला धुआं बारिश के साथ मिलकर नीचे आ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के पानी में हाइड्रोकार्बन और अन्य जहरीले रसायन मिले हुए हैं जो सीधे शरीर पर असर डाल रहे हैं।

  • त्वचा पर पानी गिरने से जलन और आंखों में तकलीफ के मामले बढ़ रहे हैं।
  • लोगों को सांस लेने में भारी दिक्कत और सिरदर्द की समस्या हो रही है।
  • तेहरान और अल्बोर्ज प्रांत में मिट्टी और पानी के स्रोत भी दूषित हो गए हैं।

प्रशासन ने लागू किए नए नियम और पाबंदियां

हालात को देखते हुए प्रशासन ने कई आपातकालीन कदम उठाए हैं। ईरानी रेड क्रीसेंट सोसाइटी ने बाहर निकलने पर मास्क पहनने और शरीर को पूरी तरह ढकने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही लोगों को अपनी गाड़ियां और घर की बाहरी दीवारें धोने को कहा गया है ताकि जहरीली धूल से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।

डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर बर्बाद होने के कारण ईंधन की सप्लाई पर भी सीधा असर पड़ा है। ईरानी पेट्रोलियम मंत्रालय ने ईंधन को लेकर नए नियम लागू किए हैं, जिससे आम जनता पर भी असर पड़ रहा है।

  • आम लोगों के लिए तेल का दैनिक कोटा 30 लीटर से घटाकर 20 लीटर कर दिया गया है।
  • WHO के प्रवक्ता क्रिश्चियन लिंडमेयर ने खराब हवा को देखते हुए घरों में रहने की सलाह दी है।
  • स्वास्थ्य उप मंत्री अली जाफरियन ने बच्चों और सांस के मरीजों के लिए इस हवा को जानलेवा बताया है।

आगे कैसा रहेगा मौसम का हाल?

पर्यावरण विभाग की प्रमुख शीना अंसारी ने इस तबाही को पर्यावरण के लिए बेहद गंभीर बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जहरीले कण कई दिनों तक हवा में रह सकते हैं। लंबे समय तक हवा में मौजूद सल्फर और नाइट्रोजन ऑक्साइड सांस के जरिए शरीर में जाने का बड़ा खतरा बना हुआ है।

हालांकि मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में मौसम सूखा रहने वाला है। अगर आगे कोई और हमला नहीं होता है और मौसम साफ रहता है, तो हवा की गुणवत्ता में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल सकता है।