4 अप्रैल 2026 को ईरान के बुशहर न्यूक्लियर प्लांट के पास अमेरिका और इसराइल ने हवाई हमले किए हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने चेतावनी दी है कि इन हमलों से न केवल ईरान बल्कि पूरे जीसीसी (GCC) क्षेत्र को बड़ा खतरा हो सकता है। उन्होंने साफ कहा कि अगर न्यूक्लियर प्लांट को नुकसान पहुंचता है, तो इसका रेडियोधर्मी असर खाड़ी देशों की राजधानियों तक जाएगा। इस घटना के बाद से पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
बुशहर न्यूक्लियर प्लांट पर हमले से क्या हुआ नुकसान?
ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने इस हमले के बाद ताजा जानकारी साझा की है। घटना के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- ईरानी अधिकारियों के अनुसार हमले में एक सुरक्षा गार्ड की मौत हो गई है और एक सपोर्ट बिल्डिंग को नुकसान पहुंचा है।
- राहत की बात यह है कि प्लांट का मुख्य हिस्सा सुरक्षित है और वहां कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ा है।
- IAEA के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने बताया है कि इलाके में रेडिएशन यानी विकिरण के स्तर में कोई बढ़ोतरी नहीं देखी गई है।
- यह फरवरी 2026 में शुरू हुए संघर्ष के बाद बुशहर फैसिलिटी के पास हुआ चौथा बड़ा हमला है।
- इसराइल की सेना ने भी 3 अप्रैल को तेहरान के पास मिसाइल डिपो और हथियार बनाने वाली जगहों पर हमले की पुष्टि की है।
खाड़ी देशों और प्रवासियों पर इस तनाव का क्या होगा असर?
ईरान और इसराइल के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और व्यापार पर पड़ रहा है। बहरीन में पिछले 24 घंटों के भीतर 8 ड्रोन हमले रिपोर्ट किए गए हैं, जिससे वहां अलर्ट जारी है। शलमचेह बॉर्डर क्रॉसिंग पर हुए हमले में एक इराकी नागरिक की मौत के बाद उस रास्ते को फिलहाल बंद कर दिया गया है।
सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे देशों के लिए सबसे बड़ी चिंता न्यूक्लियर प्लांट से निकलने वाले संभावित कचरे को लेकर है। ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि अगर कोई बड़ा हादसा होता है तो इसका असर केवल तेहरान तक सीमित नहीं रहेगा। हालांकि, व्यापार को सुचारू रखने के लिए ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जरूरी सामान ले जाने वाले जहाजों को रास्ता देने का फैसला किया है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
