Al Jazeera English की एक रिपोर्ट के अनुसार, 17 जुलाई 2026 को सैटेलाइट तस्वीरों से यह पता चला है कि ईरान के Bushehr परमाणु संयंत्र और उसके पास मौजूद सुविधाओं को नुकसान पहुँचा है। यूरोपीय Sentinel-2 सैटेलाइट तस्वीरों की जांच से पता चला है कि 7 जुलाई से 12 जुलाई 2026 के बीच यहाँ कई धमाकों के निशान बने हैं। यह इलाका अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच चर्चा में है।

हमलों पर आधिकारिक जानकारी

U.S. Central Command (CENTCOM) ने बताया कि उन्होंने 7 जुलाई से 16 जुलाई के बीच ईरान के लगभग 90 सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल और ड्रोन स्टोर करने वाली जगहें शामिल थीं। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने किसी भी परमाणु सुविधा को अपना लक्ष्य नहीं बनाया। दूसरी तरफ, Bushehr प्रांत के डिप्टी गवर्नर Ehsan Jahanian ने 9 जुलाई को संयंत्र के आसपास हमले की पुष्टि की थी, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि परमाणु रिएक्टर सुरक्षित है और काम कर रहा है।

IAEA की चेतावनी और ऊर्जा संकट

International Atomic Energy Agency (IAEA) ने साफ किया है कि किसी भी हाल में परमाणु सुविधाओं को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। एजेंसी के प्रमुख Rafael Grossi ने 12 जुलाई को चेतावनी दी थी कि इन संयंत्रों के पास हमले रोकने जरूरी हैं ताकि किसी बड़े रेडिएशन हादसे को टाला जा सके। इसके अलावा, ईरान के ऊर्जा मंत्रालय ने नागरिकों से बिजली की खपत कम करने की अपील की है क्योंकि अमेरिकी हमलों के बाद देश के ऊर्जा ग्रिड पर दबाव बढ़ गया है। 16 जुलाई को व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ने कहा कि कूटनीति का रास्ता अभी भी खुला है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.