West Asia में शांति बनाए रखने और तेल की सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए ईरान ने एक बड़ी मांग की है। ईरान का कहना है कि अगर इस इलाके में स्थिरता चाहिए, तो विदेशी सेनाओं को यहाँ से तुरंत हटाना होगा। प्रशासन के मुताबिक विदेशी फौज की मौजूदगी इस क्षेत्र की शांति में सबसे बड़ी बाधा है।

ऊर्जा सुरक्षा और विदेशी बेस पर ईरान का रुख

ईरान के तेल मंत्री Mohsen Paknejad ने भारत के Gurugram में आयोजित 11वें BRICS Energy Ministers’ Meeting के दौरान यह बात कही। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि West Asia में स्थायी सुरक्षा तभी संभव है जब विदेशी ताकतें यहाँ से चली जाएं और अमेरिका के सैन्य बेस बंद कर दिए जाएं। उनका मानना है कि सुरक्षा की जिम्मेदारी इस क्षेत्र के अपने देशों को ही संभालनी चाहिए। Paknejad ने यह भी कहा कि ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हुए पिछले हमले वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के खिलाफ एक अंधा युद्ध थे, जिससे काफी नुकसान हुआ और सप्लाई चेन भी प्रभावित हुई।

लेबनान से इजराइली सेना की वापसी पर विवाद

ईरान और रूस ने मिलकर मांग की है कि इजराइल अपनी सेना को लेबनान से जल्द से जल्द बाहर निकाले। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने 17 जून 2026 को बताया था कि अमेरिका के साथ हुए समझौते में इजराइली सैनिकों की वापसी शामिल होनी चाहिए। लेबनान के प्रधानमंत्री Nawaf Salam ने भी 25 जून को इस बात को दोहराया कि इजराइल को पूरी तरह वहां से हटना होगा। हालांकि, इजराइल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने साफ कर दिया है कि वे लेबनान से अपनी सेना नहीं हटाएंगे, चाहे अमेरिका ही इसकी मांग क्यों न करे।

अमेरिका और ईरान के बीच नया समझौता

जून 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता (MOU) साइन हुआ है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य सैन्य टकराव को खत्म करना और क्षेत्र में शक्ति का संतुलन बनाना है। इसके तहत ईरान ने Strait of Hormuz में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की गारंटी दी है और परमाणु हथियार न बनाने का वादा किया है। लेकिन अमेरिकी सेना की वापसी जैसे बड़े मुद्दों को अगली बातचीत के लिए टाल दिया गया है।

Strait of Hormuz और अन्य कूटनीतिक हलचल

ईरान की Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने 25 जून को चेतावनी दी कि Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों को केवल तेहरान द्वारा तय किए गए रास्तों का ही इस्तेमाल करना होगा। उन्होंने ओमान द्वारा बनाए गए नए अस्थायी रास्ते को खारिज कर दिया और कहा कि बिना समन्वय के बनाए गए रास्ते खतरनाक हैं।

वहीं, ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री Faisal bin Farhan Al Saud से फोन पर बात की। इस बातचीत का मकसद West Asia में स्थिरता लाना और अमेरिका के साथ चल रही बातचीत को आगे बढ़ाना था। इस बीच, ईरान ने NATO पर भी आरोप लगाया है कि वह अमेरिका के युद्ध में शामिल है और उसकी इस भूमिका के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए।