होरमुज़ जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों को लेकर ईरान ने अब इसे एक गलती बताया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक ईरान ने निजी तौर पर यह बात मानी है कि यह उनके सिस्टम की एक चूक थी। इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तो है, लेकिन दोनों देश बातचीत जारी रखने को तैयार हैं।
🚨: UAE और Egypt के विदेश मंत्रियों की फोन पर बात, मिडिल ईस्ट की सुरक्षा और वर्ल्ड कप पर हुई चर्चा।
अमेरिका ने मांग की है कि ईरान सार्वजनिक रूप से इन हमलों को बंद करे और जहाजों के आने-जाने का रास्ता बिना किसी टोल के खुला रखे। राष्ट्रपति Donald Trump ने पुष्टि की है कि अमेरिका और ईरान चर्चा जारी रखने पर सहमत हुए हैं। हालांकि, उन्होंने पुराने युद्धविराम (ceasefire) को अब खत्म कर दिया है क्योंकि ईरान की हरकतों ने समझौते का उल्लंघन किया था।
इस हफ्ते के शुरुआती दिनों में कतर और सऊदी अरब के तीन व्यापारिक टैंकरों पर हमला हुआ था। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के कुछ ठिकानों पर हमला किया, जिसके बाद ईरान ने भी गल्फ देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिका ने अब ईरान से जुड़ी कुछ संस्थाओं और लोगों पर नए प्रतिबंध भी लगा दिए हैं।
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araqchi 11 जुलाई 2026 को ओमान पहुंचे, जहां उन्होंने जहाजों के सुरक्षित रास्ते को लेकर चर्चा की। ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि उसने कच्चे तेल की बिक्री का लाइसेंस रद्द करके युद्धविराम तोड़ा है। ईरान का कहना है कि जहाजों को केवल उसके बताए रास्तों से ही गुजरना होगा, तभी उनकी सुरक्षा की गारंटी दी जा सकती है।
दूसरी तरफ, UN की शिपिंग एजेंसी की गवर्निंग काउंसिल ने देशों से अपील की है कि वे जलमार्ग पर ईरान के मालिकाना हक के दावे को खारिज करें। अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक को कंट्रोल करने की ईरान की कोशिशों का विरोध किया गया है। इस पूरे मामले में तनाव कम करने के लिए ओमान, कतर और पाकिस्तान जैसे देश मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।
