ईरान के बड़े नेता Mojtaba Khamenei ने अमेरिका और इसराइल के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन देशों के नेता ईरान में किए गए अपराधों पर गर्व कर रहे हैं। यह मामला खास तौर पर Minab के एक स्कूल पर हुए हमले से जुड़ा है जिसमें बड़ी संख्या में मासूम बच्चों की जान गई थी।
28 जून 2026 को ‘ज्यूडिशियरी वीक’ के मौके पर एक संदेश जारी करते हुए Mojtaba Khamenei ने कहा कि अमेरिका और इसराइल ने जो बयान दिए हैं, वे उनके अपराधों की स्वीकारोक्ति हैं। उन्होंने ईरान की अदालत और अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में केस चलाने की बात कही है। उनका कहना है कि इन हमलों में हुई मौतों के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए।
इस पूरे विवाद में 28 फरवरी 2026 को Minab के Shajareh Tayyebeh Elementary स्कूल पर हुआ हमला सबसे बड़ा मुद्दा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले में 156 से 180 के बीच लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर स्कूल जाने वाली लड़कियां और स्टाफ सदस्य थे। जांच में सामने आया कि इस हमले के लिए अमेरिका द्वारा बनाए गए Tomahawk मिसाइल का इस्तेमाल हुआ था। ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिकी सेना ने पुरानी जानकारी के आधार पर स्कूल को गलती से पास के सैन्य बेस का हिस्सा समझ लिया था।
ईरान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत Amir Saeid Iravani ने 26 जून 2026 को सुरक्षा परिषद में इस हमले को बच्चों के खिलाफ ‘युद्ध अपराध’ बताया था। उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन है क्योंकि इसमें बच्चों की हत्या हुई और स्कूलों को निशाना बनाया गया।
दूसरी तरफ, अमेरिका की व्हाइट हाउस प्रवक्ता ने 10 मार्च 2026 को पुष्टि की थी कि इस हमले की जांच चल रही है और रक्षा विभाग जल्द ही अपनी रिपोर्ट देगा। हालांकि, अमेरिकी सांसद Jason Crow ने अपनी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि जवाब देने में बहुत देरी की जा रही है। उन्होंने इसे अमेरिकी सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी नागरिक क्षति वाली घटना बताया और पारदर्शिता की मांग की।
ईरान ने अब अपनी न्यायपालिका को निर्देश दिया है कि वह इन संघर्षों और नुकसान से जुड़े सैकड़ों और हजारों कानूनी मामलों को गंभीरता से आगे बढ़ाएं ताकि दोषियों को सजा दिलाई जा सके।
