ईरान ने कार्गो जहाजों पर की फायरिंग, समुद्र में रोका रास्ता, UKMTO ने दी जानकारी

ईरान से निकल रहे कार्गो जहाजों पर फायरिंग की खबर सामने आई है। ब्रिटिश समुद्री एजेंसी UKMTO ने जानकारी दी कि इन जहाजों को समुद्र में रोक दिया गया है। इस घटना के बाद से समुद्री रास्तों पर तनाव बढ़ गया है, हालांकि शुरुआती रिपोर्ट में चालक दल के सुरक्षित होने की बात कही गई है।

जहाजों पर हमला कहाँ और कैसे हुआ?

UKMTO के मुताबिक 22 अप्रैल 2026 को दो अलग-अलग हमले हुए। पहला हमला ओमान के उत्तर-पूर्व में लगभग 15 समुद्री मील की दूरी पर हुआ। वहीं दूसरा हमला ईरान के तट से करीब 8 समुद्री मील दूर हुआ। बताया गया है कि ये दोनों जहाज MSC कंपनी के चार्टर पर थे।

एक घटना में IRGC की गनबोट ने बिना किसी चेतावनी के कंटेनर शिप पर फायरिंग की, जिससे जहाज के ब्रिज को काफी नुकसान पहुँचा। दूसरे जहाज को फायरिंग के बाद समुद्र में ही रोक दिया गया। इन जहाजों ने हमले के समय अपना AIS सिस्टम चालू किया था, जो इससे पहले बंद था।

ईरान और अमेरिका के बीच क्यों बढ़ा यह तनाव?

यह तनाव तब बढ़ा जब 19-20 अप्रैल को अमेरिका ने ओमान की खाड़ी में ईरान के कार्गो जहाज M/V Touska को जब्त कर लिया। इसके जवाब में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने कंटेनर जहाजों पर कार्रवाई की। ईरान का कहना है कि जहाज ने उनके निर्देशों और चेतावनियों को नजरअंदाज किया था, इसलिए फायरिंग की गई।

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा दो हफ्ते का युद्धविराम 22 अप्रैल को खत्म हो गया। ईरान ने ऐलान किया है कि जब तक अमेरिका अपना नौसैनिक घेरा नहीं हटाता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में पूरी तरह नाकाबंदी रहेगी। अमेरिका ने ईरान पर समुद्री डकैती और युद्धविराम के उल्लंघन का आरोप लगाया है।

खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों पर क्या होगा असर?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का एक बहुत महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। यहाँ होने वाली किसी भी हलचल से सामान की ढुलाई और व्यापार पर असर पड़ता है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए यह चिंता का विषय हो सकता है क्योंकि इससे सामानों की कीमतों में बदलाव आ सकता है और समुद्री यात्राओं में सुरक्षा जोखिम बढ़ सकते हैं।