ईरान के चीफ नेगोशिएटर Mohammad Baqer Qalibaf और विदेश मंत्री Abbas Araghchi 22 जून 2026 को ओमान पहुंचे। उनका मुख्य मकसद Strait of Hormuz के मैनेजमेंट और समुद्री सुरक्षा को लेकर चर्चा करना है। इस यात्रा के दौरान Qalibaf ओमान के सुल्तान Haitham bin Tariq से मुलाकात करेंगे ताकि रणनीतिक जलमार्ग के प्रबंधन के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ सके।
ओमान पहुंचने से ठीक पहले 21 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में ईरान और अमेरिका के अधिकारियों के बीच 18 घंटे तक लंबी बातचीत चली। इस मीटिंग में पाकिस्तान और कतर ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। इस बातचीत का एक बड़ा नतीजा यह रहा कि अमेरिका और ईरान के बीच एक सीधी कम्युनिकेशन लाइन शुरू करने पर सहमति बनी, ताकि Strait of Hormuz से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिले और किसी भी तरह की गलतफहमी या हादसे से बचा जा सके।
इसके साथ ही ईरान, अमेरिका और लेबनान ने लेबनान में युद्ध रोकने और सैन्य ऑपरेशंस को बंद करने के लिए एक ‘de-confliction cell’ बनाने का फैसला किया। सभी पक्ष अगले 60 दिनों के भीतर एक अंतिम समझौते पर पहुंचने के लिए रोडमैप पर सहमत हुए हैं, जिसे लेकर स्विट्जरलैंड में तकनीकी बातचीत जारी रहेगी।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने जानकारी दी कि ईरान ने Strait of Hormuz में फ्री और ओपन ट्रांजिट सुनिश्चित करने और IAEA के निरीक्षकों को देश में आने देने का वादा किया है। इस प्रतिबद्धता के बाद अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान के कच्चे तेल के उत्पादन, बिक्री और डिलीवरी पर लगे प्रतिबंधों को 21 अगस्त 2026 तक के लिए अस्थायी रूप से हटा लिया है।
हालांकि, ईरान ने 21 जून 2026 को यह दावा किया था कि लेबनान में इजरायली हमलों के जवाब में वह Strait of Hormuz को बंद कर रहा है। लेकिन US Central Command ने इस दावे को गलत बताया और कहा कि जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के जारी रही। इससे पहले 16 जून को भी ईरान और ओमान ने सुरक्षित समुद्री नेविगेशन के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई थी।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने यह स्पष्ट किया कि स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत के दौरान परमाणु कार्यक्रम पर कोई चर्चा नहीं हुई और ईरान ने इस संबंध में कोई नया वादा नहीं किया है।
