ईरान और चीन के बीच दोस्ती और गहरी होती दिख रही है जिससे दुनिया की नजरें अब बीजिंग पर टिकी हैं। ईरान ने चीन के शांति प्रस्ताव का समर्थन किया है ताकि खाड़ी देशों में सुरक्षा और विकास बना रहे। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के शांति प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिससे तनाव और बढ़ सकता है।

🗞️: India में जुटेंगे BRICS देश, ईरान के विदेश मंत्री Araghchi करेंगे दिल्ली का दौरा, होगी बड़ी बैठक

चीन का क्या रोल है और ईरान क्यों कर रहा है समर्थन?

ईरान के राजदूत Abdolreza Rahmani Fazli ने बताया कि चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping ने Gulf की सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास के लिए एक ‘चार सूत्रीय योजना’ बनाई है और ईरान इसका पूरा समर्थन करता है। एक अधिकारी के मुताबिक चीन तनाव कम करने की कोशिशों में बड़ी भूमिका निभा रहा है और वह ईरान की राजनीतिक रणनीति का एक अहम हिस्सा बन चुका है। चीन और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच हुई मुलाकात में भी इस बात पर जोर दिया गया कि Persian Gulf में स्थायी सुरक्षा जरूरी है।

अमेरिका का क्या रुख है और ट्रंप ने क्या कहा?

राष्ट्रपति Donald Trump इस समय बीजिंग में हैं और वहां Xi Jinping से मुलाकात कर रहे हैं। ट्रंप ने साफ तौर पर कहा कि ईरान के साथ युद्धविराम अब खत्म होने की कगार पर है। उन्होंने ईरान के शांति प्रस्ताव को ‘बिल्कुल अस्वीकार्य’ बताकर खारिज कर दिया है। इसके साथ ही अमेरिका ने 12 ऐसे लोगों और संस्थाओं पर नए प्रतिबंध लगाए हैं जो चीन को ईरानी तेल बेचने और भेजने में मदद कर रहे थे।

पाकिस्तान और अन्य देशों की क्या भूमिका रही?

ईरान ने युद्ध रोकने के लिए अपना जवाब पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया है। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने यह साफ कर दिया कि बातचीत अपने अधिकारों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए है न कि आत्मसमर्पण के लिए। इसी बीच ब्रिटेन ने भी ईरान से जुड़े 12 लोगों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं क्योंकि उन पर ब्रिटेन में अस्थिरता फैलाने और हमले की साजिश रचने का आरोप है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

चीन की चार सूत्रीय योजना क्या है?

यह योजना राष्ट्रपति Xi Jinping द्वारा Persian Gulf में स्थायी सुरक्षा और साझा विकास को बढ़ावा देने के लिए तैयार की गई है।

अमेरिका ने ईरान से जुड़े लोगों पर प्रतिबंध क्यों लगाए?

अमेरिका ने उन 12 व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं जो चीन को ईरानी तेल की बिक्री और शिपमेंट में मदद कर रहे थे।