ईरान और चीन के विदेश मंत्रियों ने 17 जून 2026 को एक फोन कॉल के जरिए महत्वपूर्ण बातचीत की। इस बातचीत का मुख्य मुद्दा अमेरिका और ईरान के बीच हुआ एक बीच का समझौता (interim agreement) था। दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि इस समझौते को पूरी तरह लागू करने की जिम्मेदारी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की है।

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परमाणु हथियारों और सैन्य धमकी पर रोक

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 17 जून को यह साफ किया कि इस समझौते के तहत ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं होगी। इस डील में कुछ खास शर्तें तय की गई हैं:

  • बातचीत का समय: परमाणु कार्यक्रम की सीमा तय करने के लिए 60 दिनों का समय दिया गया है, जिसे आगे बढ़ाया भी जा सकता है।
  • सैन्य वादा: अमेरिका ने भरोसा दिया है कि वह ईरान को कोई सैन्य धमकी नहीं देगा।
  • ईरान की शर्त: ईरान अपने मौजूदा परमाणु कार्यक्रम को चालू रख सकेगा, लेकिन वह इसका विस्तार नहीं करेगा और न ही नए हथियार बनाएगा।

तेल की बिक्री और प्रतिबंधों में राहत

इस समझौते का सबसे बड़ा असर ईरान की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान पर लगे कुछ प्रतिबंधों में ढील दी है, जिससे ईरान अब अपना तेल खुलकर बेच सकेगा। अमेरिका ने यह भी वादा किया है कि अगर परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम समझौता हो जाता है, तो ईरान पर लगे सभी अमेरिकी और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध खत्म कर दिए जाएंगे।

स्विट्जरलैंड में होगा मुख्य समझौता

चीन ने अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम (ceasefire) को सख्ती से मानने की अपील की है। अब दुनिया की नजरें 19 जून 2026 पर टिकी हैं, क्योंकि इसी दिन स्विट्जरलैंड में एक बड़े शांति समझौते पर औपचारिक रूप से दस्तखत होने वाले हैं।

इन देशों ने दिया समर्थन

इस समझौते को सफल बनाने में Pakistan ने बीच-बचाव (mediation) की अहम भूमिका निभाई है। इसके अलावा यूरोपीय संघ, जापान, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री और संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस समझौते का स्वागत किया है।