ईरान ने अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर नज़र रखने के लिए चीन से एक सैटेलाइट लिया है. Financial Times की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सैटेलाइट की मदद से ईरान ने सऊदी अरब और अन्य देशों में मौजूद अमेरिकी बेस की तस्वीरें ली हैं. यह खबर ऐसे समय में आई है जब पश्चिम एशिया में तनाव काफी बढ़ गया है और युद्ध विराम की स्थिति बहुत नाजुक है.
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चीन का कौन सा सैटेलाइट है और यह क्या कर सकता है?
इस सैटेलाइट का नाम TEE-01B है, जिसे चीन की Earth Eye Co कंपनी ने बनाया था. यह जून 2024 में लॉन्च हुआ था और ईरान ने इसे 2024 के अंत में हासिल किया. इस सैटेलाइट की क्षमता इतनी है कि यह 0.5 मीटर तक की बारीक तस्वीरें ले सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की IRGC Aerospace Force इसका इस्तेमाल अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सटीक निगरानी के लिए कर रही है.
किन देशों के अमेरिकी बेस पर रखी जा रही है नज़र?
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने कई महत्वपूर्ण जगहों की निगरानी की है. इन ठिकानों की जानकारी नीचे टेबल में दी गई है:
| देश | निगरानी किया गया ठिकाना |
|---|---|
| सऊदी अरब | Prince Sultan Air Base |
| जॉर्डन | Muwaffaq Salti Air Base |
| बहरीन | अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट नेवल बेस (मनामा) |
| इराक | Erbil एयरपोर्ट |
मार्च 2026 में सऊदी अरब के Prince Sultan Air Base पर हुए हमलों से पहले और बाद की तस्वीरें इस सैटेलाइट से ली गई थीं. 14 मार्च को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कन्फर्म किया था कि इस बेस पर मौजूद अमेरिकी विमानों पर हमला हुआ था.
चीन, अमेरिका और ईरान का इस पर क्या कहना है?
चीन के विदेश मंत्रालय और वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने इन रिपोर्ट को गलत बताया है. चीन का कहना है कि ईरान को सैन्य मदद देने की खबरें पूरी तरह मनगढ़ंत हैं. दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर चीन ने ईरान को एयर डिफेंस सिस्टम दिया, तो चीन को बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा. वहीं, ईरान के सांसद अली निकजाद ने कहा कि सुप्रीम लीडर अली खमनेई की मौत का बदला सही समय और जगह पर लिया जाएगा.
