ईरान की राजधानी तेहरान में इन दिनों एक अलग ही नज़ारा दिख रहा है. वहां की सरकार ने आम नागरिकों के लिए मिलिट्री ट्रेनिंग शुरू कर दी है. लोगों को बंदूक चलाना और हथियारों का इस्तेमाल करना सिखाया जा रहा है. इस ट्रेनिंग में न केवल पुरुष, बल्कि महिलाएं और बच्चे भी हिस्सा ले रहे हैं.

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क्या है यह ट्रेनिंग और कौन लोग ले रहे हैं हिस्सा

अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान में आम लोगों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जा रही है. IRGC और बसजी फोर्स के इंस्ट्रक्टर लोगों को कलाशनिकोव जैसी राइफल चलाना सिखा रहे हैं. यह ट्रेनिंग शहर के विभिन्न हिस्सों, जैसे वान्क स्क्वायर और हफ़्त-ए तिर स्क्वायर में चल रही है. 18 मई को जारी फुटेज में देखा गया कि युवा महिलाओं और लड़कियों को हथियारों के रख-रखाव का प्रशिक्षण दिया गया. यह सब ‘होमलैंड-डिफेंडिंग कॉम्बैटेंट्स’ मुहिम के तहत किया जा रहा है.

ट्रेनिंग पूरी करने वालों को क्या मिलेगा और इसका मकसद क्या है

बसजी फोर्स के ट्रेनर हादी खुशेह ने बताया कि इस कोर्स को पूरा करने वाले लोगों को ‘Janfada’ कार्ड दिया जाएगा. यह कार्ड इस बात का सबूत होगा कि व्यक्ति बुनियादी हथियार चलाने में सक्षम है और ज़रूरत पड़ने पर देश की रक्षा कर सकता है. IRGC के सैनिक नासिर सादेगी ने कहा कि लोग इसमें अपनी मर्ज़ी से शामिल हो रहे हैं. उन्होंने बताया कि इसका मकसद शहीदी की संस्कृति को बढ़ावा देना है, खासकर पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद.

बच्चों की ट्रेनिंग पर क्यों उठ रहे हैं सवाल

ईरान के टीचर्स यूनियन ने 20 मई को इस ट्रेनिंग पर गंभीर चिंता जताई है. यूनियन का कहना है कि मस्जिदों और बसजी केंद्रों में बच्चों और किशोरों को हथियार सिखाना अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है. इसे ‘बचपन का सैन्यीकरण’ बताया गया है, जो संयुक्त राष्ट्र के बाल अधिकारों के कन्वेंशन का उल्लंघन हो सकता है. यूनियन ने इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है.

Frequently Asked Questions (FAQs)

तेहरान में नागरिकों को क्या सिखाया जा रहा है

नागरिकों को मुख्य रूप से कलाशनिकोव जैसी राइफल चलाना और हथियारों के रखरखाव की ट्रेनिंग दी जा रही है.

‘Janfada’ कार्ड क्या है

यह एक सर्टिफिकेट है जो उन लोगों को मिलता है जिन्होंने बुनियादी हथियार प्रशिक्षण पूरा कर लिया है, ताकि वे संकट के समय देश की मदद कर सकें.