ईरान ने एक बार फिर दुनिया को बता दिया है कि Strait of Hormuz पर सिर्फ उसका अधिकार है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि यह इलाका US CENTCOM के कंट्रोल में नहीं है। ईरान का मानना है कि जब तक अमेरिकी सेना यहाँ रहेगी, तब तक इस क्षेत्र में शांति नहीं आ सकती।

ईरान के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर Kazem Gharibabadi ने कहा कि बहरीन में होने वाली सैन्य मीटिंग्स से फारस की खाड़ी में सुरक्षा नहीं आ सकती। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि असली सुरक्षा तभी होगी जब अमेरिका अपनी सेना को यहाँ से हटा लेगा और दूसरे देशों के मामलों में दखल देना बंद करेगा।

समुद्री रास्तों और माइन हटाने पर ईरान का कड़ा रुख

Gharibabadi ने यह भी बताया कि समुद्र से बारूदी सुरंगें (mines) हटाने का काम सिर्फ ईरान करेगा। उन्होंने फ्रांस को चेतावनी दी कि वह इस संवेदनशील मामले में दखल न दे। इसके अलावा, ईरान ने कहा कि वह Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों पर अपना कंट्रोल रखेगा। ईरान के संसद स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि ईरान यहाँ से गुजरने वाले जहाजों से फीस वसूलना जारी रखेगा।

हाल ही में एक विदेशी कंटेनर शिप ईरान द्वारा बताए गए रास्ते से नहीं गया और वह समुद्र में फंस गया। ईरान ने इसे अपने कंट्रोल के तौर पर पेश किया और सभी शिपिंग कंपनियों को Revolutionary Guard के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी।

अमेरिका और US CENTCOM की कार्रवाई

दूसरी तरफ, US CENTCOM ने बहरीन में 12 देशों के सैन्य प्रतिनिधियों के साथ सुरक्षा बैठक की। अमेरिका ने यह भी बताया कि 26 और 27 जून 2026 को उन्होंने ईरान के कई सैन्य ठिकानों, ड्रोन स्टोरेज और एयर डिफेंस साइट्स पर हमले किए। यह कार्रवाई ईरान द्वारा एक टैंकर शिप पर किए गए ड्रोन हमले के जवाब में की गई थी।

अमेरिका का कहना है कि Strait of Hormuz में जहाजों का आना-जाना सामान्य है और उनकी सेना इस अंतरराष्ट्रीय रास्ते को सुरक्षित रखने के लिए तैनात है।

अन्य महत्वपूर्ण अपडेट

  • दौहा वार्ता: ईरान और कतर के बीच दोहा में बातचीत हुई, जिसमें ईरान की जमा की गई संपत्ति (frozen assets) के इस्तेमाल पर चर्चा हुई, जिससे ईरान जरूरी सामान खरीदना चाहता है।
  • मिसाइल क्षमता: ईरान के सीनियर सलाहकार Rasoul Sanaei Rad ने बताया कि ईरान अपनी मिसाइलों की रेंज और सटीकता को बढ़ाने पर काम कर रहा है।
  • ओमान के साथ चर्चा: ईरान ने जहाजों की निगरानी के लिए ओमान के साथ समझौता करने की इच्छा जताई है, लेकिन चेतावनी दी है कि अगर ओमान तैयार नहीं हुआ तो ईरान अपने प्लान पर आगे बढ़ेगा।