ईरान के UN दूत ने एक बड़ा दावा किया है कि अमेरिका और इजराइल के बीच चल रही जंग में इस्तेमाल हुए हथियार कुछ खाड़ी देशों के भंडार से आए थे। यह खबर ऐसे समय में आई है जब अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की पूरी तरह नाकाबंदी कर दी है। इस तनाव से पूरी दुनिया में तेल और समुद्री व्यापार पर असर पड़ने की आशंका है और दुनिया की नजरें अब शांति वार्ता पर टिकी हैं।
ईरान ने UN में क्या आरोप लगाए हैं?
ईरान के UN Envoy ने कहा कि US-Israeli युद्ध में जिन हथियारों का इस्तेमाल हुआ, वे कुछ Persian Gulf राज्यों के हथियारों के जखीरे का हिस्सा थे। इससे पहले 11 मार्च को ईरान के राजदूत ने UN सुरक्षा परिषद की आलोचना की थी। उन्होंने अमेरिका और इजराइल पर स्कूलों और अस्पतालों जैसे नागरिक इलाकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया था।
अमेरिका की नाकाबंदी और शांति की कोशिशें क्या हैं?
15 अप्रैल 2026 को US Central Command (CENTCOM) ने ऐलान किया कि ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी पूरी तरह लागू हो गई है। अब ईरान के अंदर आने और बाहर जाने वाला सारा समुद्री व्यापार रुक गया है। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा शांति वार्ता कराने की कोशिश कर रहा है। राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया है कि यह युद्ध अब खत्म होने के बहुत करीब है।
इस जंग का आम आदमी और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
IMF ने पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका के लिए 2026 की ग्रोथ का अनुमान घटाकर 1.1% कर दिया है। इसका सीधा असर खाड़ी देशों से होने वाले तेल और गैस निर्यात पर पड़ेगा। इस स्थिति से सबसे ज्यादा ईरान, इराक और कतर प्रभावित होंगे। अमेरिका के Treasury Secretary Scott Bessent ने कहा कि लंबी सुरक्षा के लिए थोड़ा आर्थिक नुकसान सहना ठीक है।
