पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ गया है। ईरान ने आरोप लगाया है कि 19 जुलाई 2026 को तड़के करीब 3:39 बजे अमेरिका ने खुज़ेस्तान प्रांत में बन रहे उसके Darkhovin परमाणु संयंत्र पर हमला किया। इस घटना के बाद से क्षेत्र में सैन्य हलचल बढ़ गई है और ईरान ने अमेरिका के सहयोगी देशों जैसे कुवैत और जॉर्डन के खिलाफ ड्रोन हमले किए हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच टकराव
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति Donald Trump के नेतृत्व में अमेरिकी सेना ने 18 जुलाई शाम 6 बजे (ईटी) से ईरान पर अपने हमले शुरू किए थे। यह लगातार आठवीं रात थी जब अमेरिका ने सैन्य अभियान चलाया। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह हमले जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों की मौत का बदला लेने और ईरान की मिसाइल व ड्रोन क्षमता को कम करने के लिए किए गए हैं।
IAEA की सफाई
ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन (AEOI) ने इस हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने कहा है कि उन्होंने रिपोर्टों की जांच शुरू कर दी है। एजेंसी के अनुसार, Darkhovin संयंत्र निर्माण के शुरुआती दौर में था और वहां कोई परमाणु सामग्री मौजूद नहीं थी, इसलिए किसी भी तरह के विकिरण (रेडिएशन) का खतरा नहीं है। महानिदेशक Rafael Mariano Grossi ने सभी पक्षों से परमाणु स्थलों के पास संयम बरतने की अपील की है।
तनाव तब और बढ़ गया जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच हुआ समझौता विफल हो गया। ईरान के सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei ने राष्ट्रपति ट्रम्प के हस्ताक्षर वाले समझौते को बेकार बता दिया है। जॉर्डन की सेना ने भी पुष्टि की है कि उनके देश में गिरे कुछ ईरानी मिसाइलों को उनके रक्षा तंत्र ने हवा में ही नष्ट कर दिया था।
