ईरान की सेना ने बड़ा दावा किया है कि अमेरिका और इसराइल के पास अब सरेंडर करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। फरवरी 2026 में शुरू हुए इस युद्ध के बाद अब दोनों देशों के बीच शांति समझौता होने जा रहा है। ईरान ने इसे अपनी जनता की मजबूती और जीत बताया है।

ईरान की सेना के कमांड सेंटर Khatam al-Anbiya Central Headquarters ने एक आधिकारिक बयान जारी किया। इस बयान में कहा गया कि ईरान के लोगों के साहस और मजबूती ने दुश्मनों को हार मानने पर मजबूर कर दिया है। सेना ने देश के सशस्त्र बलों और रेजिस्टेंस फ्रंट की बहादुरी की तारीफ की है। बयान में कहा गया कि अमेरिकी और ज़ायोनी दुश्मनों के पास अब हार स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

यह खबर तब आई जब ईरान और अमेरिका के बीच एक समझौता (MoU) तय हुआ है। इस समझौते का मकसद उस युद्ध को हमेशा के लिए खत्म करना है जो अमेरिका और इसराइल ने 28 फरवरी 2026 को ईरान पर शुरू किया था।

ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति Mohammad-Reza Aref ने 15 जून को कहा कि यह जीत देश के सर्वोच्च नेता Ayatollah Seyyed Mojtaba Hosseini Khamenei के मार्गदर्शन की वजह से मिली है। वहीं विदेश मंत्री Abbas Araghchi का मानना है कि यह समझौता ईरानी लोगों की जीत को और मजबूत करेगा।

उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने जानकारी दी कि इस समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक तौर पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

बता दें कि 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध के दौरान ईरान के लोग हर रात अपनी सरकार के समर्थन में सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे थे। ईरान इस पूरे नतीजे को एक रणनीतिक सफलता मान रहा है और इसे अपनी सैन्य ताकत और राष्ट्रीय एकता का परिणाम बता रहा है।