ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब चरम पर पहुँच गया है। ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक, Strait of Hormuz को पूरी तरह बंद करने का ऐलान कर दिया है। यहाँ से गुजरने वाले तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों को चेतावनी दी गई है कि अगर वे बिना तालमेल के रास्ता पार करेंगे तो उन पर निशाना साधा जाएगा।
ईरान की बड़ी कार्रवाई और चेतावनी
11 जून 2026 को ईरान के मिलिट्री हेडक्वार्टर Khatam al-Anbiya ने घोषणा की कि Strait of Hormuz अब सभी जहाजों के लिए बंद है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, एक टैंकर को बिना पूर्व तालमेल के रास्ता पार करने से रोका गया। इसके अलावा ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दो ऐसे जहाजों पर हमला किया जिन्होंने नियमों का उल्लंघन करने की कोशिश की थी।
हमले और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला
यह पूरा विवाद 10 जून को शुरू हुआ जब अमेरिका ने ईरान के मिलिट्री सर्वेलांस, संचार प्रणालियों और एयर डिफेंस साइट्स पर हवाई हमले किए। अमेरिकी सेना ने कहा कि ये हमले क्षेत्र में अमेरिकी बलों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए किए गए थे। इसी दौरान ओमान के तट के पास Palau झंडे वाले टैंकर Settebello पर मिसाइल हमला हुआ, जिसमें इंजन रूम में आग लग गई। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो लोग लापता बताए गए हैं।
अमेरिका और ईरान के अलग-अलग दावे
ईरान के ब्रिगेडियर-जनरल Majid Mousavi ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने इस इलाके को अस्थिर किया तो वे पूरे क्षेत्र को नर्क बना देंगे। ईरान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि खाड़ी देशों की यह जिम्मेदारी है कि वे अमेरिका और इसराइल को अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ न करने दें।
दूसरी तरफ, अमेरिकी कमांड CENTCOM ने ईरान के रास्ता बंद करने के दावे को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि व्यापारिक जहाज अभी भी वहां से आ-जा रहे हैं और सुरक्षित रास्ते बनाए गए हैं। वहीं राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि एक बड़ा समझौता हो गया है, जिसके बाद Strait of Hormuz फिर से खुल जाएगा और ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी खत्म होगी।
अंतर्राष्ट्रीय कानून और विवाद
अंतर्राष्ट्रीय कानून UNCLOS के मुताबिक Strait of Hormuz एक अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य है, जहाँ सभी जहाजों को बिना किसी रोक-टोक के आने-जाने का अधिकार है। हालांकि, ईरान ने इस कानून पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और वह अपने हिसाब से रास्ता नियंत्रित करना चाहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस रास्ते को पूरी तरह बंद करना अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है।
