ईरान की मिलिट्री ने एक बड़ा कदम उठाते हुए Strait of Hormuz को जहाजों के लिए बंद कर दिया है. यह फैसला दक्षिण लेबनान में इसराइल द्वारा किए गए हमलों के जवाब में लिया गया है. ईरान का कहना है कि अमेरिका ने भी उनके साथ हुए समझौते का उल्लंघन किया है, इसलिए यह कार्रवाई की गई.

लेबनान में हमले और ईरान की प्रतिक्रिया

ईरान के सेंट्रल मिलिट्री कमांड यानी Khatam al-Anbiya सेंट्रल हेडक्वार्टर ने शनिवार, 20 जून 2026 को इस रास्ते को बंद करने का ऐलान किया. ईरान ने इसे पहला कदम बताया है. यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि इसराइल ने लेबनान के दक्षिणी हिस्सों में हवाई हमले किए, जिसमें कम से कम पांच लोगों की जान चली गई. ये हमले मुख्य रूप से Arabsalim, Deir Zahrani और Dweir जैसे इलाकों में हुए.

क्या था इस्लामाबाद समझौता

बता दें कि 18 जून 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के बीच ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) साइन हुआ था. इस समझौते की मुख्य बातें ये थीं:

  • सभी मोर्चों पर, खासकर लेबनान में सैन्य ऑपरेशन तुरंत और हमेशा के लिए बंद होंगे.
  • Strait of Hormuz को तुरंत खोला जाएगा और 60 दिनों तक कमर्शियल जहाजों के लिए टोल-फ्री रास्ता मिलेगा.
  • अमेरिका अपनी नौसेना की नाकाबंदी को 30 दिनों के अंदर पूरी तरह खत्म करेगा.
  • दोनों पक्ष 60 दिनों के भीतर एक अंतिम और विस्तृत डील पर बातचीत करेंगे.

बातचीत पर असर और विरोधाभास

लेबनान में इसराइल और हिज़्बुल्लाह के बीच हुई भारी लड़ाई की वजह से अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली बातचीत शुक्रवार को रद्द कर दी गई. हालांकि, अमेरिकी उपराष्ट्रपति J.D. Vance ने कहा है कि वह जल्द ही स्विट्जरलैंड जाकर ईरान के साथ चर्चा कर सकते हैं.

इस पूरे मामले में ईरान की तरफ से अलग-अलग बातें सामने आईं. शुक्रवार को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाएई ने Strait of Hormuz बंद होने की खबरों को गलत बताया था और कहा था कि जहाजों की आवाजाही जारी है. लेकिन शनिवार को मिलिट्री कमांड ने इसे बंद करने का आधिकारिक ऐलान कर दिया.