ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक Strait of Hormuz को बंद करने का बड़ा ऐलान किया है. ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने साफ़ कहा है कि अब यहाँ से जहाजों का आना-जाना बंद रहेगा. इस फैसले से पूरी दुनिया के तेल बाजार और व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है क्योंकि यह रास्ता पेट्रोलियम उत्पादों के लिए सबसे जरूरी माना जाता है.

क्यों लिया गया यह फैसला

ईरान की IRGC Navy और Khatam al-Anbiya सेंट्रल हेडक्वार्टर ने इस बंद के पीछे अमेरिका और इसराइल को जिम्मेदार ठहराया है. ईरान का कहना है कि अमेरिका ने 17 जून को साइन किए गए एक समझौते (MoU) की शर्तों को तोड़ा है. साथ ही, इसराइल द्वारा दक्षिण लेबनान से अपनी सेना वापस न करने और वहां जारी सैन्य हमलों की वजह से यह कदम उठाया गया है.

ईरान ने चेतावनी दी है कि जो भी जहाज इस रास्ते से गुजरने की कोशिश करेंगे, उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है. हिजबुल्लाह ने भी संकेत दिए हैं कि जब तक इसराइल लेबनान में पूरी तरह से युद्ध विराम के लिए सहमत नहीं होता, तब तक यह रास्ता नहीं खुलेगा.

अमेरिका का अलग दावा

एक तरफ ईरान ने रास्ते को बंद बताया है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance और US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस बात को गलत बताया है. CENTCOM की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार 20 जून को भी 55 कमर्शियल जहाज इस रास्ते से गुजरे और करीब 1.7 करोड़ बैरल तेल की ढुलाई हुई. अमेरिका का कहना है कि समुद्री ट्रैफिक अभी भी सामान्य रूप से चल रहा है.

शांति के लिए अगली कोशिश

इस तनाव के बीच अब दुनिया की नजरें स्विट्जरलैंड के Bürgenstock पर हैं. रविवार 21 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत शुरू होने वाली है. इस मीटिंग में पाकिस्तान और कतर मध्यस्थ (Mediators) की भूमिका निभाएंगे ताकि इस विवाद को सुलझाया जा सके.

फिलहाल लेबनान में इसराइल के हमले जारी हैं जिससे वहां कई लोग मारे गए हैं. इसराइल ने अभी तक दक्षिण लेबनान से पीछे हटने से इनकार कर दिया है, जो ईरान के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है.