Iran Conflict: ईरान ने दी खुली चेतावनी, सीमा में घुसपैठ का मिलेगा करारा जवाब
ईरान के एक शीर्ष सैन्य कमांडर ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि उनके देश की जल, थल या हवाई सीमा में किसी भी तरह की घुसपैठ का करारा जवाब दिया जाएगा. यह बयान हाल ही में हिंद महासागर में ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को निशाना बनाए जाने के बाद आया है. ईरान की सेना और IRGC ने अपनी सीमा पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया है और वे किसी भी बाहरी हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं.
ईरान की सेना ने क्या चेतावनी दी?
ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, 15 मार्च 2026 को ईरानी सेना के कमांडर ने सीमा सुरक्षा को लेकर सख्त संदेश दिया है. सेना ने कहा है कि अगर किसी ने भी उनके देश के बॉर्डर में घुसने की कोशिश की, तो उसे ऐसा जवाब मिलेगा जिससे उसे पछताना पड़ेगा.
- ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा के लिए कड़े कदम उठाने का निर्देश दिया है.
- मेजर जनरल अब्दुलरहीम मौसवी ने कहा है कि सीमा पर अमेरिका की हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है.
- IRGC और ग्राउंड फोर्सेज ने ‘फिंगर ऑन द ट्रिगर’ का ऐलान किया है, जिसका मतलब है कि सेना हर वक्त हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार है.
IRIS Dena युद्धपोत पर हमले के बाद बढ़ा तनाव
यह चेतावनी तब आई जब हाल ही में हिंद महासागर में अमेरिका की एक पनडुब्बी ने ईरान के IRIS Dena युद्धपोत को डुबो दिया. मेजर जनरल अमीर हातमी ने 14 मार्च को इसकी पुष्टि की और कहा कि इस हमले का जवाब जरूर दिया जाएगा. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी बयान दिया है कि अमेरिका को समुद्र में किए गए इस हमले पर भारी पछतावा होगा. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने साफ किया है कि किसी भी तरह के आक्रामक हमले का करारा जवाब दिया जाएगा.
क्षेत्रीय हालात और आम जनता पर असर
इस तनाव के बीच ईरान ने Strait of Hormuz को बंद रखा है, जिसका इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है. ईरान के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि उनकी कार्रवाई का निशाना सिर्फ अमेरिकी और इजरायली सैन्य बेस हैं, ताकि पड़ोसी देशों के साथ सीधा युद्ध न हो. दूसरी ओर, इस संघर्ष के कारण आम जनजीवन काफी प्रभावित हुआ है.
- स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, संघर्ष में अब तक हजारों लोग घायल हुए हैं.
- लगातार हमलों के कारण 19,000 से ज्यादा इमारतों और आम बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है.
- इन मुश्किल हालात के बाद भी 13 मार्च को अल-कुद्स दिवस पर राजधानी तेहरान और अन्य शहरों में लोगों ने बड़े पैमाने पर रैलियां निकालीं.




