ईरान ने इसराइल के हमलों की कड़ी निंदा की, अमेरिका को भी बताया हमलों में बराबर का भागीदार।

मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने लेबनान के दक्षिणी हिस्सों में इसराइल द्वारा किए गए हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने इस दौरान अमेरिका पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिका भी इस क्षेत्र में हो रहे इसराइली अपराधों में पूरी तरह से शामिल है और उनका साझीदार है। ईरान के इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट की स्थिति पर दुनिया भर की नजरें टिक गई हैं। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप ANI News पर रिपोर्ट देख सकते हैं।
लेबनान में बुनियादी ढांचे को पहुँचा नुकसान
ईरान के प्रवक्ता ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में इसराइल की तरफ से किए गए इन भयानक हमलों में कई लेबनानी नागरिकों की जान चली गई और कई लोग घायल हो गए। इन हमलों की वजह से वहां आम लोगों के घर और जरूरी बुनियादी ढांचा पूरी तरह से तबाह हो गया है। ईरान ने साफ कहा कि वाशिंगटन की तरफ से इसराइल को मिलने वाले भारी समर्थन की वजह से ही अमेरिका इन सभी वारदातों में बराबर का हिस्सेदार बनता है, चाहे वह लेबनान की बात हो या फिर कब्जे वाले फलस्तीन और पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र की।
अंतरराष्ट्रीय संगठनों पर उठाए गए सवाल
ईरान ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों, खासतौर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की चुप्पी और उदासीनता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि इन बड़े संगठनों की खामोशी की वजह से ही इसराइल के हौसले और ज्यादा बुलंद हो रहे हैं। इसके साथ ही ईरान ने लेबनान के साथ अपनी पूरी एकजुटता दिखाई और कहा कि वह लेबनान की संप्रभुता, गरिमा और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास में उसका पूरा समर्थन करता है।
अमेरिका और अन्य देशों की प्रतिक्रियाएं
इन बयानों से कुछ दिन पहले, यानी 10 अगस्त 2026 को अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने गाजा और लेबनान में हुए जानमाल के नुकसान के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराया था और तेहरान से मुआवजे की मांग की थी। वहीं दूसरी तरफ, अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि हिजबुल्लाह लेबनान और इसराइल के बीच चल रही बातचीत की प्रक्रिया को बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है। इसके साथ ही जर्मनी के विदेश मंत्री Johann Wadephul ने भी ईरान से अपील की कि वह अपने पड़ोसी देशों और अमेरिका के साथ मिलकर बातचीत का रास्ता अपनाए और होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित जहाज़ानी के लिए बिना किसी शर्त के खोलने पर जोर दिया।