ईरान के विदेश मंत्रालय ने 23 जुलाई 2026 को यूनाइटेड किंगडम के खिलाफ कड़ी आपत्ति जताई है। ईरान का आरोप है कि ब्रिटेन अपने सैन्य अड्डों का उपयोग अमेरिका को करने दे रहा है, जिससे ईरान पर हमले किए जा रहे हैं। ईरान ने इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार दिया है।
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ब्रिटिश सैन्य अड्डों पर ईरान का कड़ा रुख
ईरान का कहना है कि ब्रिटेन का यह कदम यूएन महासभा के प्रस्ताव 3314 के अनुच्छेद 3(f) के तहत आक्रामकता है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि जो देश उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई में मदद करेगा, उसे इसके परिणामों के लिए जिम्मेदार माना जाएगा। ईरान ने ब्रिटेन पर अमेरिकी अभियान और युद्ध अपराधों में मिलीभगत का भी गंभीर आरोप लगाया है।
तनावपूर्ण स्थिति और राजनयिक असर
यूके के प्रधानमंत्री Andy Burnham ने Diego Garcia और RAF Fairford जैसे ब्रिटिश सैन्य अड्डों का इस्तेमाल जारी रखने की मंजूरी दी है। इस बढ़ते तनाव के बीच 22 जुलाई 2026 को यूके के विदेश मंत्रालय ने ईरान से अपने दूतावास के कर्मचारियों को वापस बुला लिया है।
मिसाइल और ड्रोन हमलों से बढ़ा खतरा
अमेरिका लगातार 12 दिनों से ईरान के समुद्री ठिकानों, मिसाइल डिपो और एयर डिफेंस सिस्टम पर हमले कर रहा है। इसके जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने 22 जुलाई 2026 को Bahrain और Kuwait में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। साथ ही, 23 जुलाई 2026 को जॉर्डन की ओर भी चार मिसाइलें और छह ड्रोन दागे गए हैं। इस क्षेत्र में चल रही सैन्य गतिविधियों के कारण खाड़ी देशों में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
