ईरान का अमेरिका और इसराइल पर बड़ा आरोप, ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को किया तबाह, काउंसिल ने बताया युद्ध अपराध
ईरान की हाई काउंसिल फॉर ह्यूमन राइट्स ने अमेरिका और इसराइल द्वारा देश के धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की है। काउंसिल ने इन हमलों को सीधा युद्ध अपराध बताया है। उनका कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय नियमों की पूरी तरह अनदेखी है और इसका मकसद ईरान की पहचान को मिटाना है।
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कितना नुकसान हुआ और कौन से स्थल प्रभावित हुए?
ईरान के सांस्कृतिक विरासत मंत्री रज़ा सालेही अमीरी ने बताया कि 28 फरवरी से 7 अप्रैल के बीच 20 राज्यों के करीब 140 ऐतिहासिक स्थल क्षतिग्रस्त हुए। इस तबाही से लगभग 49 मिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ है। कुछ प्रमुख प्रभावित स्थलों की सूची नीचे दी गई है।
| प्रभावित स्थल | शहर/क्षेत्र |
|---|---|
| गोलेस्तान पैलेस | तेहरान |
| चेहेल सोतौन पैलेस | इस्फहान |
| अली कापू इंपीरियल पैलेस | इस्फहान |
| मस्जिद-ए जामे (ग्रैंड मस्जिद) | इस्फहान |
| नक्श-ए जहां स्क्वायर | इस्फहान |
| तेहरान यहूदी सिनेगॉग | तेहरान |
| सेंट निकोलस ऑर्थोडॉक्स कैथेड्रल | तेहरान |
| फलक-ओल-अफलक किला | खोरमबाद |
अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन और आधिकारिक बयान?
ईरानी काउंसिल ने कहा कि ये हमले 1954 के हेग कन्वेंशन और 1972 के यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज कन्वेंशन का उल्लंघन हैं। विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने जिनेवा में मानवाधिकार परिषद को बताया कि हमलों का तरीका किसी खास पहचान को मिटाने की साजिश जैसा था।
यूनेस्को ने भी कई स्थलों के क्षतिग्रस्त होने की पुष्टि की है। यूनेस्को के मुताबिक उन्होंने सभी पक्षों को विरासत स्थलों के सही लोकेशन पहले ही भेज दिए थे ताकि उन्हें बचाया जा सके। वहीं इस्फहान प्रांत के गवर्नर ने बताया कि इस नुकसान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय संगठनों में कानूनी शिकायत दर्ज की जाएगी।