ईरान की ह्यूमन राइट्स काउंसिल ने हाल ही में ईरान के भीतर हुए अमेरिकी सैन्य हमलों की कड़ी निंदा की है। काउंसिल का कहना है कि ये हमले अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का गंभीर उल्लंघन हैं। 8 जुलाई और 13 जुलाई 2026 को हुए इन हमलों में भारी तबाही की खबर सामने आई है।
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हमलों में हुआ भारी नुकसान
रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों की जद में 250 से ज्यादा स्थान आए, जिनमें से ज्यादातर दक्षिणी ईरान में स्थित थे। इन घटनाओं में 20 ईरानी नागरिकों की मौत हो गई, जिनमें एक महिला भी शामिल है, जबकि 150 लोग घायल हुए हैं। हमलों के कारण सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, जैसे कि इंटरनेशनल रेलवे लाइन, बंदरगाहों और एक बच्चों के कैंसर अस्पताल के पास के इलाके को काफी नुकसान पहुंचा है।
सरकार का रुख और मांग
ईरान के विदेश मंत्रालय ने 16 जुलाई 2026 को इन हमलों को ‘युद्ध अपराध’ करार दिया था। इसके बाद 17 जुलाई 2026 को ईरान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत ने महासचिव को पत्र लिखकर इन हमलों पर विरोध जताया। ईरान की काउंसिल ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से मांग की है कि वे इन उल्लंघनों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएं, दोषियों को जिम्मेदार ठहराएं और पीड़ितों को मुआवजा दिलाने में मदद करें। यह सब तब हुआ जब दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने के लिए सीजफायर और बातचीत की सहमति बनी थी।
