अमेरिका और खाड़ी सहयोग परिषद (PGCC) ने मिलकर एक साझा बयान जारी किया था, जिस पर ईरान ने कड़ी आपत्ति जताई है। ईरान ने इस बयान को दखलअंदाजी, गैर-जिम्मेदाराना और उकसाने वाला बताया है। ईरान का कहना है कि इस तरह के बयान क्षेत्रीय मामलों में हस्तक्षेप करने की एक कोशिश हैं।
क्या था अमेरिका और PGCC का बयान
25 जून 2026 को अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio और बहरीन के विदेश मंत्री Dr. Abdullatif bin Rashid Al Zayani की अध्यक्षता में एक बैठक हुई थी। इस बैठक में अमेरिका ने PGCC देशों की सुरक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों पक्षों ने 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते (MOU) का स्वागत किया, जिसमें पाकिस्तान और कतर ने मध्यस्थता की थी। इस बयान में ईरान के परमाणु हथियारों, मिसाइलों और ड्रोन के खतरों को रोकने की बात कही गई थी। साथ ही, Strait of Hormuz में जहाजों की बिना किसी रोक-टोक के आवाजाही पर जोर दिया गया।
ईरान ने क्यों जताई नाराजगी
ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका की मौजूदगी से क्षेत्र में असुरक्षा और बंटवारा बढ़ा है। ईरान ने आरोप लगाया कि 28 फरवरी से 8 अप्रैल 2026 के बीच अमेरिकी ठिकानों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमले करने के लिए किया गया। ईरान ने यह भी कहा कि वह अपनी संप्रभुता की रक्षा करेगा और उसने परमाणु कार्यक्रम को लेकर लगाए गए आरोपों को “बड़ा झूठ” बताया।
प्रॉक्सि और अन्य विवाद
अमेरिका ने फिलिस्तीन और लेबनान के समूहों को ईरान का मोहरा (proxy) बताया था, जिसे ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया। ईरान का कहना है कि इन समूहों की लड़ाई अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जायज है और क्षेत्र में केवल ‘जियोनिस्ट शासन’ ही असली मोहरा है। ईरान ने खाड़ी देशों से अपील की है कि वे अपने इलाकों को ईरान के खिलाफ गैरकानूनी कामों के लिए इस्तेमाल न होने दें।
हाल की अन्य घटनाएं
- 25 जून 2026 को IRGC ने ओमान के पास एक जहाज पर हमला किया।
- 17 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम और परमाणु मुद्दों पर एक समझौता (MOU) हुआ था।
- 10 जून 2026 को ईरान ने अमेरिकी सैन्य हमलों की कड़ी निंदा की थी, जिसमें एक Apache हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ था।
