ईरान ने अमेरिका के नए प्रतिबंधों को बताया संप्रभुता पर हमला, स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को लेकर बढ़ा तनाव

हाल ही में ईरान सरकार ने अमेरिका की तरफ से आने वाले नए प्रतिबंधों को लेकर कड़ा विरोध जताया है और इसे देश की संप्रभुता पर बहुत बड़ा खतरा बताया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने इन उपायों को केवल आर्थिक युद्ध मानने से इंकार किया और कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र के नियमों का खुला उल्लंघन है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मामले को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और दुनिया भर के देशों की इस पर कड़ी नजर बनी हुई है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव
यह पूरा कूटनीतिक विवाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के उस बयान के बाद शुरू हुआ जिसमें उन्होंने कहा था कि Strait of Hormuz अमेरिकी इलाका है और इस पर उनका पूरा नियंत्रण है। इसके बाद अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने घोषणा की कि उनका प्रशासन इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध तैयार कर रहा है। इन प्रतिबंधों को सोमवार को लागू किया जाना है और इसका मुख्य उद्देश्य वर्तमान ईरानी शासन को पूरी तरह से गिराना है। अमेरिकी सचिव ने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों और विरोधियों दोनों को चेतावनी देते हुए साफ कहा कि सभी को या तो अमेरिका के साथ रहना होगा या फिर उसके खिलाफ खड़ा होना होगा।
ईरान के भीतर नेतृत्व की स्थिति
ईरान के अंदर इस समय हालात को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है और वहां का नेतृत्व सैन्य ताकत और आर्थिक समझ के बीच बंटा हुआ है। देश के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ Ali Abdollahi ने चेतावनी दी कि किसी भी नए खतरे का बहुत कड़ा जवाब दिया जाएगा जो उन्हें बहुत पछतावा कराएगा। दूसरी तरफ संसद के स्पीकर Mohammad Baqer Qalibaf ने देश की गंभीर आर्थिक स्थिति को स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि देश में महंगाई लगभग 70% तक पहुंच गई है और सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में 5% से ज्यादा की गिरावट आने की आशंका है। उन्होंने माना कि अगर देश के आम नागरिक भूखे रहेंगे तो केवल सैन्य ताकत देश को लंबे समय तक नहीं चला सकती है। इसके अलावा राष्ट्रपति Masoz Pezeshkian ने युद्ध को तुरंत रोकने की मांग की और साथ ही यह भी साफ किया कि ईरान अपनी गरिमा के साथ खड़ा है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और व्यापार पर असर
इस पूरे मामले पर दुनियाभर के देशों की तरफ से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Lin Jian ने प्रतिबंधों और दबाव की नीतियों के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाने की बात कही। वहीं दूसरी तरफ जॉर्जिया ने यूरोपीय संघ के ईरान पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों में शामिल होने से साफ इंकार कर दिया और इसके पीछे अपने राष्ट्रीय हित का हवाला दिया। इन सब तनावों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाला कमर्शियल जहाजों का आवागमन घटकर युद्ध से पहले के स्तर का केवल 20% ही रह गया है। हालांकि इनमुश्किल हालातों के बीच ईरान ने ओमान के साथ एक नए व्यापार समझौते को अंतिम रूप दे दिया है जिससे उसे कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।