इराक में तैनात ईरान समर्थित गुटों पर 28 जुलाई को अमेरिका और सऊदी अरब ने एक साथ मिलकर स्ट्राइक की। इस हमले के बाद ईरान के विदेश मंत्रालय ने 29 जुलाई 2026 को इसे इराक की संप्रभुता पर सीधा हमला बताया है। अमेरिका के CENTCOM और सऊदी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह कार्रवाई इराक से सऊदी अरब की ऊर्जा सुविधाओं और अमेरिकी सैनिकों पर पिछले 72 घंटों में हुए 30 से ज्यादा ड्रोन हमलों के जवाब में की गई है।
हमले का असर और इराक की प्रतिक्रिया
इस हमले में इराक के Popular Mobilization Forces (PMF) के कम से कम 20 लड़ाकों की मौत हुई है और 32 लोग घायल हुए हैं। इराक के प्रधानमंत्री Ali al-Zaidi ने तुरंत एक आपातकालीन बैठक बुलाई है और घटना की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने इस तनाव के चलते अपनी सऊदी अरब की प्रस्तावित यात्रा को भी फिलहाल टाल दिया है। इराकी सेना ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी दूसरे देश पर हमले के लिए नहीं होने देंगे।
क्षेत्रीय तनाव और आगे की स्थिति
ईरान ने आरोप लगाया है कि ये हमले अमेरिका और इसराइल की चाल हैं ताकि इलाके में युद्ध बढ़ाया जा सके। वहीं, दूसरी तरफ जॉर्डन की सेना ने भी 29 जुलाई को अपनी सीमा में घुसने की कोशिश कर रहे 5 ईरानी मिसाइलों को मार गिराया है। सऊदी अरब ने माना है कि उसने संयुक्त हमलों में हिस्सा लिया है क्योंकि उनके पेट्रोलियम ठिकानों को लगातार ड्रोन हमलों से निशाना बनाया जा रहा था। खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) ने भी सऊदी अरब पर हो रहे हमलों की निंदा की है और इराकी मौलवी Muqtada al-Sadr ने भी गुटों से इराक की जमीन का इस्तेमाल हमलों के लिए न करने की अपील की है।
