अमेरिका की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने 12 देशों को मिलाकर एक सुरक्षा बैठक की, जिससे ईरान काफी नाराज है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने इस बैठक की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि बाहरी देशों के दखल से इस इलाके में शांति नहीं आती, बल्कि असुरक्षा और ज्यादा बढ़ती है।

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बहरीन में हुई बड़ी सैन्य बैठक

यह सुरक्षा बैठक 1 जुलाई 2026 को बहरीन डिफेंस फोर्स की मेजबानी में आयोजित की गई थी। इस मीटिंग में कुल 12 देशों के बड़े सैन्य अधिकारी शामिल हुए, जिनमें ये देश शामिल थे:

  • बहरीन, मिस्र, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, ओमान, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, यूएई और यमन।

इस बैठक की सबसे खास बात यह रही कि सीरिया और लेबनान के सैन्य लीडर्स पहली बार अमेरिका के नेतृत्व वाले किसी क्षेत्रीय रक्षा सम्मेलन में शामिल हुए। मीटिंग में मुख्य रूप से क्षेत्रीय सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के जरिए होने वाले व्यापार को सुरक्षित रखने पर चर्चा हुई।

ईरान ने उठाए सवाल

2 जुलाई 2026 को इस बैठक पर जवाब देते हुए ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सीधा सवाल पूछा कि क्या CENTCOM इस इलाके में सुरक्षा लाया है या असुरक्षा। उन्होंने कहा कि बाहरी ताकतें इतनी कमजोर हैं कि वे खुद की सुरक्षा भी नहीं कर सकतीं। अराघची के मुताबिक, इस क्षेत्र में शांति तभी आ सकती है जब बाहरी देशों का दखल पूरी तरह खत्म हो और सभी देश मिलकर काम करें।

अन्य ईरानी अधिकारियों का बयान

ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काज़ेम गरीबबादी ने भी अमेरिका की इस कोशिश को बेकार बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान के कमांड के तहत है और सुरक्षा के लिए अमेरिका को इस इलाके से बाहर निकलना होगा। वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाएई ने इस पूरी बैठक को केवल एक “दिखावा” करार दिया और कहा कि वाशिंगटन अपनी अस्थिर नीतियों को छिपाने के लिए ऐसा कर रहा है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.